हड़ताल पर मजदूर संगठनों का 25 करोड़ लोगों के शामिल होने का दावा

Team NewsPlatform | January 8, 2020

Bankers' strike on August 25 and 26 to protest against merger of banks

 

केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ दस मजदूर संगठनों के सदस्य देशव्यापी हड़ताल पर चले गए हैं.  यूनियनों ने राष्ट्रव्यापी हड़ताल में 25 करोड़ लोगों के शामिल होने का दावा किया है.  यूनियनों ने अपनी 12 सूत्रीय मांगों के लिए हड़ताल बुलाई है. इनमें न्यूनतम वेतन और सामाजिक सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं.

केंद्र सरकार की नीतियों श्रम सुधार, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और निजीकरण के खिलाफ केंद्रीय ट्रेड यूनियनों राष्ट्रव्यापी हड़ताल पर हैं.

ट्रेड यूनियनों इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, एसईडब्ल्यूए, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ, यूटीयूसी सहित विभिन्न संघों और फेडरेशनों ने पिछले साल सितंबर में आठ जनवरी को हड़ताल पर जाने की घोषणा की थी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से संबद्ध भारतीय मजदूर संघ हड़ताल में शामिल नहीं है.

भेल और ऑयल यूनियन हड़ताल पर: कौर

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस (एटक) की महासचिव अमरजीत कौर ने कहा कि इस राष्ट्रव्यापी हड़ताल में 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के सदस्यों के साथ विभिन्न क्षेत्रीय महासंघ भी हिस्सा ले रहे हैं. केंद्रीय यूनियनों में एटक, इंटक, सीटू, एआईसीसीटीयू, सेवा, एलपीएफ समेत अन्य शामिल हैं.

उन्होंनेबताया, ‘हम महंगाई, सार्वजनिक कंपनियों की बिक्री, रेलवे, रक्षा, कोयला समेत अन्य क्षेत्रों में 100 प्रतिशत एफडीआई और 44 श्रम कानूनों को संहिताबद्ध करने (श्रम संहिता) के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं.’

कौर ने कहा कि हमारी अन्य मांगों में सभी के लिए 6000 रुपये न्यूनतम पेंशन, किसानों के लिए न्यूनतम समर्थम मूल्य (एमएसपी) और लोगों को राशन की पर्याप्त आपूर्ति शामिल हैं.

उन्होंने कहा कि दिल्ली में बारिश आंदोलन पर असर नहीं डाल सकी है. श्रमिक राज्य के औद्योगिक क्षेत्रों में जुलूस निकालेंगे और योजना के मुताबिक, कर्मचारी आईटीओ पर एकत्र होंगे और फिर यहां से जुलूस निकालेंगे.

कौर ने कहा, ‘हमें पूरे देश भर से खबरें मिल रही हैं. भेल के कर्मचारी हड़ताल पर चले गए हैं. ऑयल यूनियन हड़ताल पर है.  पूर्वोत्तर, ओडिशा, पुडुचेरी, केरल और महाराष्ट्र में बंद की स्थिति है.’

दस केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने संयुक्त बयान में कहा, ”आठ जनवरी को आगामी आम हड़ताल में हम कम से कम 25 करोड़ लोगों की भागीदारी की उम्मीद कर रहे हैं. उसके बाद हम कई और कदम उठाएंगे और सरकार से श्रमिक विरोधी, जनविरोधी, राष्ट्र विरोधी नीतियों को वापस लेने की मांग करेंगे.

बयान में कहा गया है, ”श्रम मंत्रालय अब तक श्रमिको को उनकी किसी भी मांग पर आश्वासन देने में विफल रहा है. श्रम मंत्रालय ने दो जनवरी, 2020 को बैठक बुलाई थी. सरकार का रवैया श्रमिकों के प्रति अवमानना का है.”

राहुल गांधी ने बंद का किया समर्थन, सरकार पर पीएसयू को कमजोर करने का आरोप

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने ‘भारत बंद’ का समर्थन करते हुए नरेंद्र मोदी सरकार पर सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसयू) को कमजोर करने का आरोप लगाया.

उन्होंने ट्वीट कर कहा, ‘मोदी-शाह सरकार की जनविरोधी, श्रमिक विरोधी नीतियों ने भयावह बेरोजगारी पैदा की है और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कमजोर किया जा रहा है, ताकि इन्हें मोदी के पूंजीपति मित्रों को बेचने को सही ठहराया जा सके.’

गांधी ने कहा, ‘आज 25 करोड़ कामगारों ने इसके विरोध में भारत बंद बुलाया है. मैं उन्हें सलाम करता हूं.’

60 छात्र संगठनों का हड़ताल में शामिल होने का दावा

बयान में कहा गया है कि छात्रों के 60 संगठनों तथा कुछ विश्वविद्यालय के पदाधिकारियों ने भी हड़ताल में शामिल होने का फैसला किया है. उनका एजेंडा बढ़ी फीस और शिक्षा के व्यावसायीकरण का विरोध करने का है.

ट्रेड यूनियनों ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिंसा तथा अन्य विश्वविद्यालय परिसरों में इसी तरह की घटनाओं की आलोचना की है और देशभर में छात्रों तथा शिक्षकों को समर्थन देने की घोषणा की है.

श्रम कानूनों की संहिता बनाने और सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण का विरोध

यूनियनों ने इस बात पर नाराजगी जताई कि जुलाई, 2015 से एक भी भारतीय श्रम सम्मेलन का आयोजन नहीं हुआ है. यूनियनों ने श्रम कानूनों की संहिता बनाने और सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण का भी विरोध किया है

बैंकिंग सेवा प्रभावित

देशव्यापी हड़ताल में बैंक कर्मचारियों के शामिल होने से बैंकिंग सेवाओं पर असर पड़ा है.

हड़ताल की वजह से देश में कई जगहों पर सार्वजनिक बैंकों की शाखाओं में नकदी जमा करने और निकालने समेत अन्य गतिविधियां प्रभावित रहीं.

ज्यादातर बैंक पहले ही अपने ग्राहकों को हड़ताल और उससे बैंकिंग सेवाओं पर पड़ने वाले असर के बारे में ग्राहकों को बता चुके हैं. बैंक कर्मचारियों के सगठनों एआईबीईए, एआईबीओए, बीईएफआई, आईएनबीईएफ, आईएनबीओसी और बैंक कर्मचारी सेना महासंघ ने हड़ताल का समर्थन करने और इसमें भाग लेने की इच्छा जाहिर की थी.

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने पीटीआई-भाषा को बताया कि बैंक कर्मचारियों ने 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के राष्ट्रव्यापी हड़ताल के आह्वान का समर्थन किया है.

उन्होंने कहा, ‘हमने बैंक विलय, निजीकरण, शुल्क वृद्धि और वेतन से जुड़े अन्य मुद्दों को लेकर सरकार की नीतियों का विरोध किया है.’

ऑल इंडिया रिजर्व बैंक एंप्लॉयज एसोसिएशन (एआईआरबीईए) और ऑल इंडिया रिजर्व बैंक वर्कर्स फेडरेशन (एआईआरबीडब्ल्यूएफ) और कुछ बीमा यूनियनों ने भी हड़ताल का समर्थन किया है.

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सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से कहा है कि वे अपने कर्मचारियों को आठ जनवरी की प्रस्तावित हड़ताल से दूर रहने को कहें. 

सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों से इसके साथ ही कामकाज के सुचारू तरीके से संचालन को आपात योजना भी तैयार करने की सलाह दी है.

एक कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है, ”कोई भी कर्मचारी यदि हड़ताल पर जाता है तो उसे इसका नतीजा भुगतना होगा. उसका वेतन काटने के अलावा उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है.”

केंद्र सरकार ने अपने कर्मचारियों को चेताया है कि यदि वे आठ जनवरी को हड़ताल में शामिल होते हैं तो उन्हें इसका ‘नतीजा’ भुगतना पड़ेगा.

कार्मिक मंत्रालय की ओर से जारी आदेश में कर्मचारियों को यह चेतावनी देते हुए हड़ताल से दूर रहने को कहा गया है.

सरकारी आदेश में कहा गया है कि यदि कोई कर्मचारी हड़ताल पर जाता है तो उसे उसके नतीजे भुगतने होंगे. वेतन काटने के अलावा उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जा सकती है.

केंद्र सरकार के सभी विभागों को भेजे गए आदेश में कहा गया है कि मौजूदा निर्देश किसी भी सरकारी कर्मचारी को हड़ताल में शामिल होने से रोकता है. इसके अलावा वे व्यापक रूप से ‘आकस्मिक’ अवकाश भी नहीं ले सकते.

इसमें कहा गया है कि संघ या यूनियन बनाने का अधिकार हड़ताल या आंदोलन का अधिकार नहीं देता.

मंत्रालय ने कहा, ”इस तरह का कोई सांविधिक प्रावधान नहीं है जो कर्मचारियों को हड़ताल पर जाने का अधिकार देता हो.”

आदेश में कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों में भी कहा गया है कि हड़ताल पर जाना एक अनुशासनहीनता है. इसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए.

आदेश में सभी अधिकारियों से आग्रह किया गया है कि वे अपने अधिकारियों और कर्मचारियों का ‘आकस्मिक’ या किसी अन्य तरह का अवकाश मंजूर नहीं करें. यह आदेश केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को भी भेजा गया है. सीआईएसएफ से कड़ी निगरानी सुनिश्चित करने को कहा गया है.

हरियाणा रोडवेज ने छुट्टियां रद्द की

हरियाणा रोडवेज तालमेल कमेटी द्वारा सात जनवरी को और विभिन्न ट्रेड यूनियनों द्वारा आठ जनवरी को आयोजित की जाने वाली हड़ताल के मद्देनजर रोडवेज ने अपने कर्मचारियों की छुट्टियां रद्द कर दी हैं.

रोडवेज तालमेल कमेटी के सदस्य एवं डिपो प्रधान कृष्ण ऊण ने आरोप लगाया कि सरकार व विभाग अधिकारी रोडवेज की हड़ताल रोकने का प्रयास कर रहे हैं.

प्रदेश सरकार द्वारा कथित तौर पर शुरू की जा रही किलोमीटर स्कीम को लेकर रोडवेज कर्मचारियों में रोष है.


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