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विवादित ढांचे की जमीन हिंदुओं को दी जाए: सुप्रीम कोर्ट

tenure of special judge in babri demolition case extended

 

राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले में सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला सुनाया. सीजेआई रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस धनन्जय वाई चन्द्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सर्वसम्मति से अपना फैसला सुनाया.

– राम जन्मभूमि कोई न्यायिक शख्सियत नहीं हैं.

-निर्मोही अखाड़ा केवल एक प्रबंधक है. कोर्ट ने निर्मोही अखाड़ा की याचिका खारिज की.

-कोर्ट ने कहा, एएसआई की रिपोर्ट से यह बातें सामने आती हैं; बाबरी मस्जिद पहले से खाली जमीन पर नहीं बनाई गई थी. विवादित ढांचे के नीचे पहले से एक ढांचा था, जो एक इस्लामिक ढांचा नहीं था.

-फैसला कोर्ट के सामने मौजूद तथ्यों के आधार पर किया जाएगा, आस्था और मान्यताओं के आधार पर फैसला नहीं.

-मस्जिद गिराना कानून के खिलाफ.

-सुन्नी वक्फ बोर्ड यह साबित नहीं कर पाया कि यहां उसका एक्सक्लूजिव अधिकार है.

-ये कहा जा सकता है कि हिन्दू बाहरी चबूतरे पर पूजा किया करते थे. मुस्लिम पक्ष साबित नहीं कर पाया कि चबूतरे के अंदरूनी हिस्से पर सन् 1857 से पहले उनका एक्सक्लूजिव अधिकार था.

-मस्जिद बनाने के लिए मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में दूसरी जगह जमीन मिलेगी. 5 एकड़ जमीन देने का आदेश.

-विवादित ढांचे की जमीन हिंदूओं को दी जाए. केंद्र सरकार मंदिर बनाने के लिए नियम बनाएगा.

-फिलहाल विवादित जमीन का कब्जा रिसीवर के पास रहेगा.