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छोटे और मंझोले उद्योगों के कर्ज संकट को दूर करने के लिए होगी नई व्यवस्था

 

देश में सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योग (एमएसएमई) फिलहाल कर्ज संकट से जूझ रहे हैं. नोटंबदी और जीएसटी की दोहरी मार झेल रहे इस क्षेत्र के कर्ज संकट को दूर करने के लिए आरबीआई ने पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री (पीसीआर) की दिशा में काम करना शुरू कर दिया है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर विरल आचार्य ने बताया कि आरबीआई छोटे उद्यागों को दिए जाने वाले कर्ज व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सार्वजनिक/पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री (पीसीआर) के जरिये आधारभूत बदलाव लाने की दिशा में काम कर रहा है.

आचार्य का यह बयान ऐसे समय में आया है जब बीते महीने केंद्रीय बोर्ड ने मौद्रिक प्राधिकरण को सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योगों को 25 करोड़ तक दिए जाने वाले कर्ज व्यवस्था में बदलाव करने के सुझाव दिए थे.

केंद्र सरकार लगातार बोर्ड पर लघु और मझोले उद्योगों की स्थिति में सुधार लाने की दिशा में सुझाव देने के लिए दबाव ढाल रही थी. इसके साथ ही सरकार ने त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई व्यवस्था (पीसीए) को आसान बनाने के लिए भी बोर्ड से सुझाव मांगे थे. जिसके बाद नोटबंदी और जीएसटी की दोहरी मार झेल रहे सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योगों की स्थिति में सुधार लाने के लिए बोर्ड की ओर से सुझाव दिए गए.

बोर्ड के सुझावों को ध्यान में रखते हुए आरबीआई ने दूसरे बैंकों को कर्ज मुहैया कराने के लिए 21 राज्य संचालित बैंकों में से 11 को चुना है. ये बैंक बाकी दूसरे बैंकों को कर्ज देने में मदद करेंगे ताकि छोटे उद्योगों को आसानी की बड़ा कर्ज दिया जा सके.

एक कार्यक्रम के दौरान विरल आचार्य ने कहा कि, “आरबीआई लघु उद्यमियों को दिए जाने वाले ऋण संबंधित समस्याओं को सुलझाने के लिए सकारात्मक रवैया अपना रहा है. अगर वो लिया गया कर्ज नहीं लोटा पाते हैं तो उनके कर्ज को माफ कर देना या 8-9 महीने का समय देना समाधान नहीं है. हम इस व्यवस्था में जमीनी स्तर पर सुधार करने के लिए आधारभूत बदलाव लाने की दिशा में काम कर रहे हैं.”

उन्होंने कहा कि “रिजर्व बैंक लोन डिफॉल्ट घटाने, कर्ज संस्कृति को बेहतर बनाने और वित्तीय समावेश को प्रोत्साहित करने के लिए पब्लिक क्रेडिट रजिस्ट्री (पीसीआर) बना रहा है. इस डेटाबेस में उधारकर्ताओं की ऋण संबंधी सभी जानकारी होगी जैसे पहले लिया गया लोन और उनकी आय. इससे ऋणदाता के पास सही जानकारी होगी और वह भरोसे के साथ कर्ज दे पाएगा. क्योंकि आसानी से जोखिम विश्लेषण किया जा सकेगा.”

आचार्य ने कहा कि पीसीआर तक पहुंच को भी ध्यान में रखा जायेगा. उन्होंने बताया कि पीसीआर पर काम किया जा रहा है. इसे पूरी तरह से लागू होने में अभी समय लगेगा, क्योंकि इसके लिए जरूरी डेटाबेस तैयार किया जा रहा है.