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क्रिसमस पर रामकृष्ण मठ ने पादरी को न्योता भेज दिया प्यार और शांति का संदेश

ramakrishna mission kolkata invites archbishop to address people on christmas

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कलकत्ता में रामकृष्ण मठ और रामकृष्ण मिशन ने एक चर्च के प्रमुख पादरी को क्रिसमस की शाम पर लोगों को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया है.

‘द टेलीग्राफ’ में छपी एक खबर के मुताबिक कलकत्ता में गोलपार्क स्थित उनके द रामकृष्ण मिशन इंस्टिट्यूट ऑफ कल्चर में भाषण देने के लिए मठ की ओर से पादरी थॉमस डिसूजा को आमंत्रण भेजा गया. प्रमुख पादरी ने आमंत्रण को यह कहते हुए स्वीकार किया कि “आज के समय में दूसरे धर्मों को समझना हमारे लिए पहले से ज्यादा जरूरी हो गया है.” उन्होंने कहा कि “जरूरी है कि लोगों के बीच दोस्ती और विश्वास बना रहे.”

क्रिसमस की शाम पर आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में प्रमुख पादरी थॉमस डिसूजा और मठ के गोलपार्क स्थित संस्थान के सचिव स्वामी स्वरूपानंद मौजूद रहेंगे.

चर्च के अधिकारियों ने बताया कि अमूमन ऐसा नहीं होता है कि क्रिसमस के दिन प्रमुख पादरी बाहर से किसी का न्योता स्वीकार करे लेकिन इस बार उन्होंने ये फैसला लिया क्योंकि “हम एक ऐसे दौर से गुजर रहे हैं जहां हमें एक दूसरे के बीच प्यार और शांति का माहौल बनाए रखने की जरूरत है.”

ये आयोजन मठ, मिशन और क्रिसमस के त्योहार के बीच एक महत्वपूर्ण संबंध को याद करते हुए आयोजित किया जा रहा है. एक वरिष्ठ मठाधारी इसके पीछे की कहानी बताते हुए कहा कि “साल 1886 में श्री रामकृष्ण की मृत्यु के चार महीने बाद दिसंबर के महीने में स्वामी विवेकानंद और उनके मठ के कुछ साथी हुगली के पास अंतपुर गांव में इकट्ठा हुए थे.”

आगे कहानी बताते हुए उन्होंने कहा, “उस दौरान एक रात स्वामी जी अपने भाइयों के साथ बैठे थे और उन्हें संन्यास लेने के लिए प्रेरित किया. अगले दिन उन्हें पता चला कि कल क्रिसमस की शाम थी. इसके बाद उन्होंने संन्यास लिया और रामकृष्ण मठ के साथ रामकृष्ण मिशन की शुरुआत की.”

उन्होंने कहा, यही वजह है कि मठाधारी और दूसरे भक्त क्रिसमस के दिन को एक नई शुरुआत के रूप में मनाते हैं. हर साल रामकृष्ण मठ और मिशन के मुख्यालय बेलुर मठ में क्रिसमस की शाम पर मठाधारी मदर मेरी की गोद में जीसस क्राइस्ट की एक तस्वीर की पूजा करते हैं.