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नमाज पर नोटिस से हुआ विवाद, विपक्ष ने इस कदम को बताया एकतरफा

noida police issued notice over namaz says no namaz in park

 

नोएडा प्रशासन ने निजी कंपनियों को अपने कर्मचारियों को सार्वजनिक पार्क में नमाज अदा करने से रोकने के लिए नोटिस जारी किया था, जिस पर अब विवाद पैदा हो गया. बसपा ने इसे एकतरफा कार्रवाई बताया, जबकि भाजपा ने कहा कि इस मुद्दे को साम्प्रदायिक रंग दिया जा रहा है.

भाजपा ने यह कहते हुए इस आदेश का बचाव किया कि किसी भी क्षेत्र की पुलिस का प्राथमिक कर्तव्य सांप्रदायिक सौहार्द्र कायम रखना है, ताकि कानून व्यवस्था की कोई समस्या न हो.

इस बीच, ग्रेटर नोएडा में सरकारी भूमि पर होने जा रही श्रीमद्भागवत कथा को रोक दिया गया क्योंकि अधिकारियों ने पाया कि इसके लिए जरूरी अनुमति नहीं ली गयी थी. ग्रेटर नोएडा औद्योगिक विकास प्राधिकरण के अधिकारियों ने एक भूखण्ड से तम्बू, मंच और लाउडस्पीकर हटवा दिए जिसका इसके आयोजकों ने विरोध किया. यह भूखंड प्राधिकरण का है.

क्या है पूरा विवाद?

नोएडा सेक्टर 58 पुलिस थाना के प्रभारी पंकज राय ने इस महीने की शुरूआत में 23 निजी कंपनियों को नोटिस भेज कर उनसे अपने मुस्लिम कर्मचारियों को एक स्थानीय पार्क में शुक्रवार की नमाज अदा करने से रोकने को कहा था. उन्होंने इसके लिए 2009 के उच्चतम न्यायालय के एक आदेश का जिक्र किया था जो सार्वजनिक स्थानों पर धार्मिक जमावड़े को निषिद्ध करता है.

नोएडा प्रशासन ने कहा है कि सार्वजनिक स्थानों पर अनधिकृत धार्मिक जमावड़े की इजाजत नहीं होगी.

राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

बीएसपी प्रमुख मायावती ने इस कदम को बुधवार को अनुचित और एकतरफा कार्रवाई बताया.

मायावती ने एक बयान में सवाल किया, ”अगर उत्तर प्रदेश में योगी सरकार की सार्वजनिक स्थलों पर धार्मिक गतिविधियों पर पाबन्दी लगाने की कोई नीति है तो वह सभी धर्मों के लोगों पर समान तौर पर तथा पूरे प्रदेश के हर जिले तथा हर जगह सख्ती से बिना किसी भेदभाव के क्यों नहीं लागू की जा रही है ?”

मायावती ने कहा कि इससे भाजपा सरकार की नीयत और नीति दोनों पर ही उंगली उठना और धार्मिक भेदभाव का आरोप लगना स्वाभाविक है. उन्होंने कहा कि चुनाव के समय इस प्रकार के धार्मिक विवादों को पैदा कर भाजपा सरकार अपनी कमियों और विफलताओं पर से लोगों का ध्यान बांटना चाहती है.

वहीं भाजपा नेता गिरिराज सिंह ने पुलिस के फैसला का बचाव करते हुए कहा, ‘‘जो कानून आड़े आ जाए, तो उसे धर्म से जोड़ देते हैं. क्या नमाज पढ़ने के लिए पार्क का अतिक्रमण करना जरूरी है? ’’

एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने उत्तर प्रदेश सरकार पर हमला बोलते हुए हैदराबाद में कहा कि वह कांवरियों पर तो गुलाब की पंखुड़ियां बरसा रही थी पर सार्वजनिक जगहों पर प्रार्थना करने वाले मुस्लिम आस्तिकों को नोटिस जारी कर रही है.

उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी इस आदेश की आलोचना करते हुए कहा कि सरकार और प्रशासन भाजपा कार्यकर्ताओं जैसा बर्ताव कर रह रहे हैं.

एसपी प्रवक्ता जूही सिंह ने पूछा कि क्या जिला प्रशासन कंपनियों को इस तरह का आदेश जारी कर सकता है.

वहीं, देवबंद के मुफ्ती ने कहा है कि सरकारी जमीन पर नमाज पढ़ना गलत है. देवबंद के मुफ्ती अहमद गौड़ ने कहा कि पार्क आदि में नमाज पढ़ने से यदि कोई विवाद पैदा होता है या वह स्थल सार्वजनिक है अथवा सरकारी इसका ध्यान नमाजियों को रखना चाहिए. नमाजियों को वहां के सरकारी अमले या जमीन के मालिक से इजाजत लेकर ही नमाज अदा करनी चाहिए क्योंकि शरीयत ऐसी जगह पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं देती.

आदेश की निंदा करते हुए जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा, ‘‘प्रशासन का इस तरह का कदम स्वतंत्र भारत के इतिहास में अपनी तरह का पहला कदम है. हम इसकी निंदा करते हैं.’’