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राजस्थान: स्थानीय निकाय चुनावों में खत्म होगी शैक्षणिक अनिवार्यता

New Rajasthan cabinet scraps education criteria for civic poll candidates

 

राजस्थान सरकार ने पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता को खत्म करने का फैसला किया है. राजस्थान में कांग्रेस के नेतृत्व में बनी सरकार की पहली कैबिनेट मीटिंग में ये फैसला किया गया.

पिछली वसुंधरा राजे सरकार ने 2015 में जिला परिषद, पंचायत समिति और नगर निगम चुनावों में खड़े होने के लिए 10वीं, सरपंच चुनावों के लिए आठवीं और अनुसूचित इलाकों में सरपंच चुनावों के लिए पांचवी पास करना अनिवार्य कर दिया था.

इससे पहले गहलोत सरकार की ओर राज्य में चल रही पाठ्य पुस्तकों में परिवर्तन करने की बात भी कही जा चुकी है. सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया था कि वह पुस्तकों में महात्मा गांधी और देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू पर जरूरी अध्यायों को फिर से शामिल करेगी. नवनिर्मित कांग्रेस सरकार ने बीजेपी पर शिक्षा के भगवाकरण का आरोप लगाया है.

सूचना और जनसंपर्क मंत्री रघु शर्मा ने बताया, ‘‘कांग्रेस सरकार ने पंचायती राज और स्थानीय निकायों में चुनाव लड़ने के लिए शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता को खत्म करने का फैसला किया है. हमारे लोकतंत्र में विधानसभा चुनावों में खड़े होने के लिए किसी तरह की शैक्षणिक योग्यता अनिवार्य नहीं है, ऐसे में हमारे पास कोई अधिकार नहीं है कि हम लोगों को शैक्षणिक योग्यता के आधार पर पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने से रोके.’’

कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों से पहले अपने जन घोषणा पत्र में स्थानीय चुनावों में शैक्षणिक योग्यता खत्म करने का वादा किया था.

डॉ. भीमराव आंबेडकर विधि विश्वविद्यालय और हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय फिर शुरू किया जाएगा. गहलोत ने अपने पिछले कार्यकाल में इन दोनों संस्थानों की शुरुआत की थी जिसे वसुंधरा राजे सरकार ने बंद कर दिया.

गहलोत सरकार ने इसे तत्काल शुरू करने का फैसला किया है. इसके अलावा कैबिनेट की बैठक में सरकारी लैटरहेड पर से पंडित दीनदयाल की तस्वीर हटाने और उसकी जगह अशोक स्तंभ को ही केंद्र में रखने का भी फैसला किया गया है.

सरकार ने दो स्लैब में मिल रही 500 रुपये और 750 रुपये की वृद्धावस्था पेंशन में 250 रुपये की बढ़ोतरी करने का फैसला किया है. पेंशन बढ़ने के बाद राज्य में बुजुर्गों को 500 रुपये की जगह 750 रुपये दिए जाएंगे और जिन्हें अब तक 750 रुपये मिल रहे थे उन्हें 1000 रुपये दिए जाएंगे.