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कमलनाथ की शासन-शैली की पहली झलक

कमलनाथ की कार्यशौैली की

  PTI

मुख्‍यमंत्री की कुर्सी संभालते ही कमलनाथ ने बहुत सधे अंदाज में अपनी कार्यशैली का परिचय दिया. मंत्रालय में अधिकारियों के साथ पहली बैठक में उनका यह कहना काफी अहम है कि अधिकारी अपना नजरिया बदलें. उनका इशारा 15 सालों के दौरान कायम रही कार्य-प्रणाली की तरफ था. वैसे तो ब्‍यूरोक्रेसी बेहद लचीली होती है- यानी उसे ‘आका’ की मंशा के अनुरूप चलना और चाल बदलना आता है.

इसके बावजूद कमलनाथ ने पहली बैठक में जो कहा वह केवल औपचारिक रूप से दिया गया प्रथम वक्‍तव्‍य नहीं है. बल्कि इसका अर्थ यह लगाया गया है कि अब अफसरों को अपने मुखिया के इरादों को भांप कर काम करना होगा. अपने पहले संबोधन में कमलनाथ के शब्‍द तो नर्म थे, मगर लहजा सख्‍त था. मानो संदेश हो कि काम करिए, नहीं तो बदल दिए जाएंगे. अब यह देखना दिलचस्‍प होगा कि मुख्‍यमंत्री के इस संदेश का अफसरों के बीच कितना गहरा असर होता है.

कमलनाथ ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से अपने पहले संबोधन में कहा कि यथास्थिति बनाए रखने के दृष्टिकोण को बदलने की जरूरत होगी. जो चल रहा है, चलने दें या ऐसे ही चलता है- जैसा नजरिया अब नहीं चलेगा. नए नजरिये और नए दृष्टिकोण के साथ व्यवस्था में परिवर्तन लाना होगा. उन्होंने मुख्य सचिव को कांग्रेस पार्टी का वचन-पत्र सौंपते हुए कहा कि यह जनता की अपेक्षाओं का दस्तावेज है. इसे हर वर्ग ने तैयार किया है. इसे लागू करने के लिए नए संसाधनों को तलाशना और ‘आउट ऑफ बाक्स’ सोच अपनाना होगा. फिजूल खर्ची को रोकना होगा. जनता का पैसा अर्थपूर्ण तरीके से खर्च करना होगा. हम सब जनता के पैसों के प्रति जवाबदेह हैं.

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से अपेक्षा की कि वे खुद में बदलाव लाएं। नए दृष्टिकोण से चीजों को देखें। उन्होंने कहा कि सुधार और परिवर्तन में फर्क है. अचीवमेंट और फुलफिलमेंट में फर्क है. फुलफिलमेंट ज्यादा महत्त्वपूर्ण है.

नए मुख्यमंत्री का संदेश है कि जनता के काम समय पर होने चाहिए. लोगों को भोपाल तक चक्‍कर न लगाना पड़े. कमलनाथ ने अफसरों के सामने एक रोडमैप रखा है. यह रोडमैप है कांग्रेस के वचन-पत्र को पूरा करने का. साथ ही यह साफ किया गया है कि योजनाओं को नई पीढ़ी की अपेक्षाओं पर केंद्रित कर बनाया जाए.

कमलनाथ की प्राथमिकता में निवेश लाना प्रमुख है. उनका कहना है कि सिर्फ नीतियों और मांगने से निवेश नहीं आता. निवेश को आकर्षित करना पड़ेगा. बरहाल, मप्र में यह आकर्षण कैसे पैदा हो, यह नए मुख्यमंत्री को सिद्ध करेगा. फिजूलखर्ची रोकने के लिए कमलनाथ ने कुछ विभागों को बंद करने के संकेत दिए हैं. निगम-मंडलों को भी खत्‍म किया जा सकता है. यानी वे लोकलुभावन निर्णयों के साथ जल्‍द ही कुछ कड़े निर्णय भी लेंगे. इन निर्णयों का मैदानी अक्‍स कैसा होगा यह अभी साफ नहीं है.