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बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण में नियमों का उल्लंघन

 

जापान इंटरनेशनल कॉरपोरेशन एजेंसी(जेआईसीए) ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए हुए जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में एजेंसी की गाइडलाइन का उल्लंघन पाया है. जेआईसीए प्रस्तावित बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए फंड दे रही है.

अंग्रेजी अखबार द हिन्दू में छपी खबर के मुताबिक जेआईसीए के अधिकारी गुजरात में संबंधित प्राधिकार(आर्थोरिटी) को इसके बारे में अवगत करवा दिया है.

किसानों के एक प्रतिनिधि ने कहा कि उन्होंने जेआईसीए के अधिकारियों को मुआवजा की राशि घटाने की बात बताई है.

राज्य की ओर से जमीन अधिग्रहण मामले में जेआईसीए गाइलाइन के उल्लंघन को लेकर 1,000 किसानों ने गुजरात हाई कोर्ट में शिकायत दर्ज की थी.  इसके बाद जेआईसीए की टीम ने किसानों के प्रतिनिधि सहित सूरत, भरूच और वलसाड के आंदोलनकारियों से मुलाकात की थी.

पर्यावरण सुरक्षा समिति(पीएसएस) से जुड़े रोहित प्रजापति कहते हैं, “मुलाकात के बाद जेआईसीए की टीम ने हमारी तकलीफों को दूर करने का भरोसा दिया है कि जेआईसीए की गाइडलाइन का पालन किया जाएगा.”

गुजरात खडुत समाज के जयेश पटेल भी जेआईसीए टीम के साथ मुलाकात कर चुके हैं.  किसानों का आरोप है कि सितम्बर 2015 में भारत और जापान सरकार के बीच परियोजना को लेकर समझौता होने के बाद  जमीन अधिग्रहण अधिनियम, 2013 को कमजोर किया गया है.

बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए गुजरात और महाराष्ट्र में 1,400 हेक्टर जमीन का अधिग्रहण किया गया है. इनमें 1120 हेक्टेयर निजी जमीन का अधिग्रहण हुआ है.