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तेल कारोबार से सरकार को बाहर निकलना होगा: धर्मेंद्र प्रधान

govt has to leave oil business said dharmendra pradhan

 

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने कहा कि सरकार तेल कारोबार से निकलना चाहती है और उपभोक्ताओं के फायदे के लिए निजी कंपनियों को इस क्षेत्र में प्रवेश देना चाहती है. उन्होंने कहा कि ‘व्यवसाय’ करना सरकार का काम नहीं है.

प्रधान ने कहा, ‘तेल उत्पाद एक वस्तु है. जिसे बाजार और नियामकों पर छोड़ दिया जाना चाहिए. ऐसे में सरकार को इससे हटना पड़ेगा. पहुंच, सत्तपोषणीयता, सप्लाई सिक्योरिटी और खरीदने में आसानी, ये सरकार की प्राथमिताएं हैं और सरकार की भूमिका नीतिगत रूपरेखा बनाने की होनी चाहिए जिससे कि ग्राहकों को आसान उपलब्धता के साथ सस्ता, टिकाऊ और सुरक्षित ईंधन की गारंटी मिले.’

देश की तीसरी सबसे बड़ी तेल विक्रेता भारत पेट्रोलियम (बीपीसीएल) की प्रस्तावित बिक्री के फैसले के बाद सरकार की ओर ये पहला बयान आया है. तेल क्षेत्र में मोदी सरकार का ये पहला रणनीतिक विनिवेश है, जिसके पहले प्रस्ताव को अगले हफ्ते मंजूरी मिल सकती है.

हालांकि प्रधान ने देश की दूसरी सबसे बड़ी तेल रिफाइनिंग और विपणन कंपनी बीपीसीएल में हिस्सेदारी बिक्री के बारे में समयसीमा बताने से मना कर दिया. ऐसी अटकलें हैं कि केंद्रीय मंत्रिमंडल अगले सप्ताह बीपीसीएल के निजीकरण के प्रस्ताव पर विचार कर सकता है. सरकार ने चालू वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिये 1.05 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा है. इस लिहाज से बीपीसीएल में हिस्सेदारी बिक्री महत्वपूर्ण है.

केंद्र, सरकार के स्वामित्व वाली अन्य नामी कंपनियों में भी बदलाव लाने पर काम कर रही है.

जिसमें सरकारी गैस वितरण कंपनी गेल इंडिया को दो हिस्सों में बांट कर, इसके पाइपलाइन कारोबार को अलग एंटीटी बनाने और हिंदुस्तान पेट्रोलियम के भविष्य का फैसला ओएनजीसी पर छोड़ देने जैसे बदलाव शामिल हैं.

प्रधान ने टेलीकॉम, विमानन और सीमेंट उद्योगों का हवाला दिया कि कैसे प्रतियोगिता से उपभोक्ताओं का फायदा होता है. उन्होंने कहा, ‘ये सब उद्योग निजी हाथों में जाने के चलते इनमें टैरिफ में कमी आई, पहुंच और सर्विस बेहरत हुई साथ ही इनकी क्षमता में भी विस्तार हुआ.’

प्रधान ने कहा, ‘सरकार को केवल वहीं होना चाहिए जहां उसकी जरूरत जिंदगी को आसान बनाने के लिए है. सरकार का काम क्या है? नीतियां बनना. एक प्रगतिशील अर्थव्यवस्था में सरकार का काम है कि वो पूंजी निर्माण के लिए बेहतर परिस्थितियां बनाएं ना कि खुद पूंजी निर्माण करे.’