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फ्रांस के विदेश मंत्री से मुलाकात में राफेल पर चुप्पी

Foreign Minister of France met Sushma Swaraj and PM Modi

 

राफेल सौदे को लेकर मचे घमासान के बीच फ्रांस के विदेश मंत्री ज्‍यां येव्‍स ली द्रायन ने पीएम मोदी से मुलाकात की. इससे पहले उन्होंने भारत और फ्रांस के बीच हिंद-प्रशांत क्षेत्र, रक्षा, अंतरिक्ष और असैन्य परमाणु ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने को लेकर विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ बातचीत की.

फ्रांस के विदेश मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने उनके आवास पर पहुंचे. हालांकि इन दोनों मुलाकात में राफेल को लेकर कोई बयान नहीं आया है.

दोनों देशों के विदेश मंत्री की मुलाकात के बाद जैतापुर में यूरोपियन प्रेशराइज्ड रिएक्टर (ईपीआर) के काम में प्रगति की उम्मीद बढ़ी है.

सुषमा स्वराज ने कहा कि छह ईपीआर से तकरीबन 10 गीगावाट बिजली का उत्पादन होगा. यह पेरिस पर्यावरण सम्मेलन के पहले भारत की ओर से की गई इस प्रतिबद्धता के मद्देनजर महत्वपूर्ण है कि वह 2030 तक अपनी 40 प्रतिशत बिजली गैर जीवाश्म ईंधनों से पैदा करने का लक्ष्य रखता है.

मार्च में भारत और फ्रांस ने जैतापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना में तेजी लाने के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था जिसका उद्देश्य वर्ष के अंत तक स्थल पर काम शुरू करना था.

भारत और फ्रांस के बीच परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर 2008 में जैतापुर में एक परमाणु ऊर्जा संयंत्र निर्माण के लिए किया गया था. जैतापुर मुम्बई से करीब 600 किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. ऊर्जा संयंत्र में छह रिएक्टर होंगे जिनमें से प्रत्येक की क्षमता 1650 मेगावाट होगी.

एक बार स्थापित हो जाने पर जैतापुर परियोजना विश्व में सबसे बड़ा परमाणु ऊर्जा संयंत्र होगा जिसकी कुल क्षमता 9600 मेगावाट होगी.

ली द्रायन ने कहा कि यह परियोजना ‘मेक इन इंडिया’ अभियान में भी योगदान करेगी क्योंकि इसमें उत्पादन, प्रौद्योगिकी, संयुक्त अनुसंधान और प्रशिक्षण का हस्तांतरण शामिल होगा.

उन्होंने कहा, ‘‘हम दोनों अंतरिक्ष क्षेत्र में अपने संबंध मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। हम दोनों जलवायु परिवर्तन के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रहे हैं.’’

विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘पिछले साल हमारा द्विपक्षीय कारोबार 9.62 अरब यूरो का था. हमें 2022 तक 15 अरब यूरो के व्यापार तक पहुंचना है तो हमें अपने कारोबारी संबंधों को और मजबूत बनाने की दिशा में काम करना होगा।’’

स्वराज ने कहा कि 2020 तक दोनों देशों के करीब 10,000 छात्र भी एक दूसरे के देशों में जाएंगे.

ली द्रायन की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है जब फ्रांस की एयरोस्पेस कंपनी दसॉल्ट एविएशन से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को लेकर विवाद चल रहा है.

विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि दोनों नेताओं के बीच बातचीत में राफेल सौदा नहीं आया.