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डीएचएफएल संकट: 1 लाख से अधिक फिक्सड डिपॉजिट होल्डर पर पैसे गंवाने का खतरा

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दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लिमिटेड (डीएचएफएल) के एक लाख से ज्यादा फिक्सड डिपॉजिट होल्डर (सावधि जमा धारकों) के ऊपर उनके पैसे गंवाने का खतरा मंडरा रहा है.

बंधक ऋणदाता (मोर्टगेज लेनडर) कंपनी डीएचएफएल के ऊपर लगे धोखाधड़ी और फंड डायवर्जन के आरोप में कंपनी पर शिकंजा कसता चला जा रहा है.

अकाउंटिंग फर्म (कंपनी पंजीयक) केपीएमजी की ऑडिट रिपोर्ट में कंपनी में धन की हेराफेरी और गबन के संकेत मिले थे. इस रिपोर्ट के बाद पिछले कई महीनों से चल रही समाधान योजना के काम पर रोक लग सकता है.

इस खुलासे से डीएचएफएल के लेनदारों को धक्का लग सकता है.

मुख्य रूप से व्यावसायिक बैंकों ने डीएचएफएल को 38,342 करोड़ रुपये का कर्ज दे रखा है. सरकार वित्तीय अनियमितताओं के लिए संकट में फंसी डीएचएफएल के खिलाफ गंभीर धोखाधड़ी जांच कार्यालय (एसएफआईओ) की जांच का आदेश दे सकती है. अगर एसएफआईओ अपनी जांच शुरू करता है तो सभी पुनर्भुगतान के रुक जाने की संभावना है.

डीएचएफएल  ने समाधान योजना का मसौदा पेश किया था. इसमें उसने बकाया ऋण को शेयर में बदलने का प्रस्ताव रखा था. प्रस्तावित ऋण पुनर्गठन योजना के तहत उधारदाताओं को कंपनी में ऋण के एक हिस्से को इक्विटी में परिवर्तित करके एचडीएफएल में 51 फीसदी की हिस्सेदारी मिलेगी.

भारतीय रिजर्व बैंक के 7 जून को जारी हुए संकटग्रस्त संपत्ति परिपत्र के तहत योजना को अंतिम रूप दिया.

इस योजना के तहत फिक्सड डिपॉजिट धारकों में से सबसे पहले सेवानिवृत्तों को उनका पैसा लौटाया जाएगा.

6 जुलाई तक कंपनी के पास लोगों का 6,188 करोड़ रुपये जमा है. मार्च 2018 में कंपनी के पास लोगों का 10,166 करोड़ रुपये जमा था. 21 मई को एचडीएफएल ने लोगों से जमा राशि लेना बंध कर दिया था. इसके अलावा मौजूदा जमा का नवीकरण करना भी बंद कर दिया था. इसके साथ ही मौजूदा जमाओं की समयपूर्व निकासी पर भी रोक लगा दिया है. कंपनी ने ऐसा दायित्व प्रबंधन (लायबिलिटी मैनेजमेंट) को ठीक करने के लिए किया था.

समयपूर्व जमा राशि के निकासी पर रोक लगाने के बाद डीएचएफएल ने मई में वादा किया था कि कंपनी फिक्सड डिपॉजिट को मेडिकल या वित्त आपातकाल के मामले में निकालने देगी. इसके लिए धारकों को जरूरी और सही कागजात उपलब्ध कराने होंगे.

हांलाकि ऐसे कई मामले भी सामने आए हैं जब स्वास्थ्य कारणों के बावजूद कंपनी ने निकासी की इजाजत नहीं दी.

उधारदाताओं ने ऋण समाधान योजना के लिए एक ड्राफ्ट तैयार किया है. इस ड्राफ्ट में 10 साल के भीतर शून्य ब्याज दर के साथ जमाकर्ताओं का पैसा कंपनी को लौटाना होगा.

जमाकर्ताओं को उम्मीद है कि उनके समाधान योजना को जल्द से जल्द मंजूरी मिलेगी.

एक पब्लिक सेक्टर बैंक के मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने कहा, ‘एक बार जांच एजेंसी ने अपनी कार्रवाई शुरू कर दी उसके बाद प्रस्तावित समाधान योजना पीछे छूट जाएगी क्योंकि दोनों काम साथ-साथ नहीं हो सकता है.’

उन्होंने कहा, ‘हमें किसी भी तरह की समाधान योजना को लागू करने से पहले जांच पूरी हो जाने तक इंतजार करना होगा. वो भी तब जब एसएफआईओ को जांच में कंपनी के इरादे में कुछ हेराफेरी नजर नहीं आती है तो फिर समाधान योजन पर काम शुरू किया जा सकता है.’