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राजनीतिक लड़ाई सांस्कृतिक संघर्ष में बदली, ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति तोड़ी

cultural clash in west bengal, vandalism of Vidyasagar bust

 

पश्चिम बंगाल की राजनीति दिनों-दिन हिंसक होती जा रही है. व्यक्तिगत आरोप-प्रत्यारोप से आगे अब ये सांस्कृतिक धरोहरों की तोड़-फोड़ तक आ पहुंची है. बीते दिन बंगाल में पुनर्जागरण के पुरोधा रहे ईश्वरचंद्र विद्यासागर की मूर्ति को तोड़ दिया गया.

इससे पहले इस तरह के सांस्कृतिक प्रतीकों की तोड़-फोड़ का कोई मामला सामने नहीं आया था. कथित तौर पर ये काम बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने किया है. जानकारों के मुताबिक बीजेपी पहली बार राज्य में बड़ी उपस्थिति दर्ज कराने की कोशिश में है.

ईश्वरचंद्र की मूर्ति पर हमले के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को मौका मिल गया है कि वे बंगालवासियों से बोल सकें कि बीजेपी किस तरह से अतिराष्ट्रवादी उन्माद में बंगाल के गौरव को नुकसान पहुंचा रही है.

इस मामले पर बोलते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “इस घटना की आलोचना करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं. मुझे खुद में शर्म महसूस हो रही है और मैं क्षमा मांगती हूं…हम बंगाल के लोग इन बीजेपी के गुंडों की वजह से ईश्वरचंद्र विद्यासागर की कद्र नहीं कर सके. इस तरह के लोग देश के नेता बनेंगे?”

इसके बाद देर रात ममता बनर्जी ने विद्यासागर की तस्वीर को अपने ट्विटर एकाउंट की मुख्य तस्वीर के रूप में चुना. उन्होंने पार्टी के अन्य शीर्ष नेताओं से भी ऐसा ही करने को कहा.

इस लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में संस्कृति, प्रतीक और धरोहरों की लड़ाई ने तब से जोर पकड़ा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सभाओं में जय श्रीराम के नारे लगवाने शुरू किए. मोदी ने इसको इस तरह से पेश किया जैसा इसे बंगाल में बोलना वर्जित हो.

बंगाल ऐसा राज्य है जहां बहुत सी मान्यताएं हैं. कई देवताओं की पूजा की जाती है, वहां कोई नारा विशेष  एक छत्र नहीं चलता. नई तरह की परंपराओं और चलन को इजाजत देने में कोई बुराई नहीं है, लेकिन जब से राज्य में बीजेपी ने उपस्थिति दर्ज कराई है, वो खास मान्यताओं को अपनी आक्रामक राजनीति से लोगों के व्यक्तिगत विचारों पर थोपने की कोशिश में है.

ममता बनर्जी भगवा कैंप को बंगाल-विरोधी कह रही हैं. ममता कहती हैं कि शाह बीजेपी के लिए प्रचार करने आए थे. फिर उनकी पार्टी हिंसा पर उतारू हो गई और विद्यासागर की मूर्ति तोड़ डाली.

ममता ने कहा कि उन्होंने शुरुआत से ही बीजेपी को बंगाल-विरोधी कहा है जिसे अब भगवाधारियों ने सच साबित कर दिया है. इससे उनको चुनाव के अंतिम चरण में बड़ा लाभ मिलने वाला है.

ममता बनर्जी को जब अपनी रैली के बीच में इस बात की खबर मिली तो उन्होंने हमला करने का कोई मौका नहीं चूका. ममता ने कहा, “बीजेपी के दोनों नेता गुंडे हैं…ये उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, झारखंड से शरारती तत्वों को किराए पर लेकर आए हैं. वे बंगाल की धरोहरों को नष्ट करना चाहते हैं. मैं वादा करती हूं कि ऐसा नहीं होने दूंगी.”

उन्होंने कहा, “मैं आंदोलन की उपज हूं. दिल्ली जाकर आपके ऑफिस और पार्टी कार्यालय को पल में कब्जे में ले सकती हूं… इस तरह से वे सारी हदें तोड़ रहे हैं. क्या उनको लगता है कि बंगाल उनको पसंद करेगा.”

तृणमूल कांग्रेस के अन्य नेता भी ममता के सुर से सुर मिलाते नजर आए. कई नेताओं ने कहा कि ममता ने अब इस लड़ाई को बंगाल बनाम बीजेपी बना दिया है.

उधर बीजेपी भी इस घटना के बाद सकते में आ गई है. पार्टी को ये घटना किस तरह से फायदा पहुंचाए, इसके लिए पार्टी के नेता प्रयासरत नजर आए. इसको लेकर पार्टी में सभी स्तर के नेता सोशल मीडिया पर अपना पक्ष रखते रहे.

उधर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इस घटना के लिए ममता बनर्जी की पार्टी को जिम्मेदार ठहराया है.

तृणमूल कांग्रेस पर निशाना साधते हुए अमित शाह ने कहा कि उनके रोड शो से पहले ही वहां लगे बीजेपी के पोस्टर फाड़ दिए गए. ‘‘रोड शो शुरू हुआ, जिसमें अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा. करीब ढाई घंटे तक शांतिपूर्ण तरीके से रोड शो चला.’’

शाह ने कहा कि इसके बाद तीन बार हमले किए गए और तीसरे हमले में तोड़-फोड़ तथा आगजनी हुई.

उन्होंने दावा किया कि सुबह से पूरे कोलकाता में चर्चा थी कि यूनिवर्सिटी से आकर कुछ लोग दंगा करेंगे. न तो पुलिस ने कोई जांच की और न ही किसी को गिरफ्तार किया गया.