सुर्ख़ियां


देश का सबसे बड़ा डिटेंशन सेंटर लगभग बनकर तैयार: रिपोर्ट

construction work of biggest detention center in india will be completed in few month says report

 

एक हफ्ते पहले राम लीला मैदान में रैली के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत में कोई डिटेंशन कैम्प नहीं है. हालांकि उनका ये बयान गलत साबित हुआ. हिंदुस्तान टाइम्स में आज छपी एक खबर में दावा है कि असम के गोलपाड़ा जिले में बन रहा डिटेंशन सेंटर लगभग बनकर तैयार है.

खबर के मुताबिक गुवाहाटी से 129 किमी दूर गोलपाड़ा के माटिया में बन रहा ये सेंटर 25 बीघा में फैला है. इसे बनाने पर लगभग 46 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं.

देश में कोई डिटेंशन सेंटर नहीं होने का बयान देने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘झूठा’ करार देते हुए वरिष्ठ कांग्रेस नेता तरूण गोगोई ने भी दावा किया कि बीजेपी नीत सरकार ने असम के गोआलपाड़ा जिले में एक डिटेंशन सेंटर बनाने के लिए 46 करोड़ रुपये मंजूर किए थे.

निर्माण कार्य में लगे एक सनीयर वर्कर ने कहा कि ‘हम इस महीने काम पूरा कर लेते लेकिन मानसून के कारण निर्माण कार्य में देरी हो गई. मैं ध्यान दे रहा हूं कि निर्माण कार्य के लिए माल उप्लब्ध कराया जाता रहे ताकि जल्दी काम पूरा हो.’

डिटेंशन सेंटर के चारों ओर 20-22 फीट ऊंची दीवारें खड़ी की गई हैं. इसके अंदर लगभग 15 माले की बिल्डिंग तैयार की जाएगी, जिसमें हाउसिंग क्वाटर होंगे.

एक अधिकारी ने बताया कि हाउसिंग क्वाटर मार्च तक तैयार हो जाएंगे और पहले से डिटेंशन सेंटर में बंद लोगों को यहां सिफ्ट किया जाएगा.

गोलपाड़ा में बन रहे इस डिटेंशन सेंटर के अलावा असम के गोलपाड़ा, कोकराझार, जोरहाट, डिब्रूगढ़, तेजपुर और सिलचर की जेलों में छह डिटेंशन सेंटर है. गुवाहाटी हाई कोर्ट के निर्देश पर 2009-2015 के बीच इन इलाकों की जेलों के अंदर ही डिटेंशन सेंटर बनाए गए.

राज्य की 100 फॉरेन ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित किए गए इन लोगों को कोर्ट ने इन जेलों में रखने का निर्देश दिया.

असम सरकार के आंकड़ों के मुताबिक नवंबर 2019 तक इन छह डिटेंशन सेंटर में कुल 988 लोगों को रखा गया. इसमें से 957 लोगों को विदेशी घोषित कर दिया गया है, जिसमें 31 बच्चे भी शामिल हैं.

राज्य पुलिस के संदेह और इलेक्टोरल रोल में डी-मतदाता (बिना नागरिकता प्रमाण वाले संदिग्ध मतदाता) के तौर पर नामित लोगों को इन सेंटर में रखा जाता है. इन लोगों को फॉरेन ट्रिब्यूनल में अपनी नागरिकता साबित करनी होती है. अगर वो ऐसा करने में विफल रहते हैं तो उन्हें डिटेंशन सेंटर में भेज दिया जाता है.

2016- अक्टूबर 2019 के बीच हिरासत में लिए गए 28 लोगों की मौत हो गई है.

31 अगस्त 2019 को एनआरसी की अंतिम लिस्ट से 19 लाख लोग बाहर हो गए. लिस्ट से बाहर हुए लोगों के पास मौका है कि वो फॉरेन ट्रिब्यूनल में फैसले को चुनौती दे सकें. अगर कोई व्यक्ति नागरिकता साबित नहीं कर पाता है तो उसे डिटेंशन सेंटर में भेजा जा सकता है. असम में मौजूदा 100 फॉरेन ट्रिब्यूनल के अतिरिक्त 200 अन्य फॉरेन ट्रिब्यूनल बनाए जा रहे हैं.