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बैंक यूनियनों की 26 दिसंबर की प्रस्तावित हड़ताल कायम रहेगी

Public sector banks poor performance

 

विजया बैंक और देना बैंक के बैंक आफ बड़ौदा में प्रस्तावित विलय के खिलाफ सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के बैंकों के करीब 10 लाख कर्मचारियों ने 26 दिसंबर को एक दिन की हड़ताल का आह्वान किया है.

इससे पहले समाचार एजेंसी भाषा की ओर से आई ख़बर से यह भ्रम फैल गया था कि बैंक यूनियनों ने 26 दिसंबर की प्रस्तावित हड़ताल वापस ले ली है. जबकि बाद में आए स्पष्टिकरण में यह साफ किया गया है कि बैंक यूनियनों की यह हड़ताल प्रस्तावित तिथि को ही होगी.

सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के अधिकारियों की यूनियन ने प्रस्तावित विलय और वेतन-वार्ता को शीघ्र सम्पन्न करने की मांग को लेकर 21 दिसंबर को हड़ताल की थी.

सरकार ने सितंबर में सार्वजनिक क्षेत्र के विजया बैंक और देना बैंक का रिजर्व बैंक की त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) रूपरेखा के तहत बैंक ऑफ बड़ौदा में विलय करने की घोषणा की थी.

यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने कहा कि यह विलय बैंक या बैंक ग्राहकों के हित में नहीं है. वास्तव में इससे दोनों को नुकसान होगा.

यूएफबीयू नौ बैंक यूनियनों का संगठन है. इसमें ऑल इंडिया बैंक आफिसर्स कन्फेडरेशन, ऑल इंडिया बैंक एम्पलाइज एसोसिएशन और नेशनल आर्गेनाइजेशन ऑफ बैंक वर्कर्स आदि यूनियनें शामिल हैं.

यूनियनों का दावा है कि सरकार विलय के जरिए बैंकों का आकार बढ़ाना चाहती है लेकिन यदि सभी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को भी मिलाकर एक कर दिया जाए तो भी विलय के बाद अस्तित्व में आई इकाई को दुनिया के शीर्ष दस बैंकों में स्थान नहीं मिलेगा.

यूनियनों द्वारा 26 दिसंबर को रैली निकाली जाएगी और दक्षिण मुंबई के आज़ाद मैदान में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा.