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ऑटोमोबाइल क्षेत्र में बिक्री 21 फीसदी तक गिरकर 18 साल के सबसे निचले स्तर पर

Auto sales fall 21% in May facing worst decline in of 18 year

 

भारत में पिछले सात महीनों से यात्री वाहनों की बिक्री में लगातार गिरावट देखी गई है. सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स (एसआईएएम) की ओर से जारी किए गए ताजा आंकड़ें बताते हैं कि भारत में निजी वाहनों की बिक्री बीते महीने मई में घटकर पिछले 18 साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है.

घटती मांग और नॉन बैंकिंग फाइनेंस कंपनियों में नकद की कमी निजी वाहनों की बिक्री में आई भारी गिरावट के पीछे प्रमुख वजहें मानी जा रही हैं.

लाइव मिंट की खबर के मुताबिक बीते साल की तुलना में इस साल बिक्री में 20.6 फीसदी (2,39,347 वाहन) की गिरावट दर्ज की गई है. यह सिंतबर 2001 में देखी गई 22 फीसदी की गिरावट के बाद सबसे अधिक रही.

गौरतलब है कि भारत में खुदरा बिक्री की जगह फैक्टरी से निकलने वाली गाड़ियों को वाहन बिक्री के तौर देखा जाता है.

यात्री वाहनों की लगातार घटती मांग के बीच खबरें आ रही हैं कि प्रमुख कार निर्माता कंपनी मारुति, टाटा, हॉन्डा और महिंद्रा ने कुछ निश्चित समय के दौरान उत्पादन रोकने का फैसला किया है. इन कंपनियों के पास कुल मिलाकर 35 हजार करोड़ मूल्य की कारें बिक्री का इंतजार कर रही हैं.

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यात्री वाहन के क्षेत्र में बीते साल की तुलना में कार, वैन और यूटिलिटी व्हीकल की बिक्री में भारी कमी आई है. कार की बिक्री में 26 फीसदी, वैन में 27 फीसदी और यूटिलिटी व्हीकल में 5.6 फीसदी की गिरावट देखी गई है.

एसआईएएम के डायरेक्टर जनरल विष्णु माथुर ने अगले साल से लागू होने जा रहे नए नियमों की ओर इशारा करते हुए कहा,”इस क्षेत्र में लागू होने वाले नए सुरक्षा और उत्सर्जन मानदंडों को देखते हुए इंडस्ट्री व्यापक स्तर पर रिसर्च और डेवलपमेंट के क्षेत्र में निवेश कर रही है.”

इसके मद्देनजर मारुति सुजुकी एक अप्रैल 2020 से डीजल गाड़ियों के निर्माण पर रोक लगाने की घोषणा कर चुकी है. जबकि टाटा मोटर्स और महिंद्रा अलगे साल अप्रैल में कुछ डीजल वाहनों के निर्माण पर रोक लगाते हुए मौजूदा डीजल इंजन को नए भारत स्टेज VI उत्सर्जम नियमों के अनुसार बदलेंगे.

यात्री वाहनों के साथ-साथ इस साल मई में कमर्शियल व्हीकल्स की बिक्री में भी बीते साल की तुलना में 10 फीसदी (68,847 वाहन) की गिरावट दर्ज की गई.

मध्यम और भारी कमर्शियल व्हीकल्स की बिक्री में 20 फीसदी और हल्के कमर्शियल व्हीकल्स की बिक्री में 3.7 फीसदी की गिरावट रही.

ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में दोपहिया वाहनों की मांग में कमी आई है. बीते साल की तुलना में मई में दोपहिया वाहनों की कुल बिक्री में 6.7 फीसदी (करीबन 10 लाख 73 हजार वहान) की गिरावट आई है. स्कूटर की बिक्री में 7.9 फीसदी की गिरावट रही.

शहरी क्षेत्रों में कमजोर बाजार, नौकरी में कमी और वाहन बीमा प्रीमियम में बढ़ोत्तरी की वजह से दोपहिया वाहनों की बिक्री में गिरावज दर्ज की गई.

इसके अलावा मई में 5.8 फीसदी की गिरावट के साथ तिपहिया वाहनों की बिक्री में भी गिरावट देखी गई.

पिछले साल मई की तुलना में ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री की बिक्री में कुल 8.6 फीसदी (20 लाख 9 हजार वाहन) की गिरावट दर्ज की गई. वहीं ऑटोमोबाइल उत्पादन क्षेत्र में बीते साल मई महीने की तुलना में 8 फीसदी (20 लाख 51 हजार वाहन) की गिरावट दर्ज की गई.

यात्री वाहनों के उत्पादन में यह गिरावट जहां 12 फीसदी रही वहीं कामर्शियल वाहनों में ये गिरावट 10.5 फीसदी तक रही.

एसआईएएम की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक यात्री वाहनों के निर्यात में तेजी देखी जा रही है. बीते महीने कुल 48,447 कार (8 फीसदी की बढ़ोत्तरी) और 2,65,585 मोटर साईकल (5 फीसदी की बढ़ोत्तरी) निर्यात किए गए.

एसआईएएम के डिप्टी डायरेक्टर सुगतो सेन ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री में वाहनों की बिक्री के पीछे आम कारणों के साथ अन्य कारणों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं. वो कहते हैं, “ये गिरावट केवल उपभोक्ता मांग में आई कमी, पेट्रोल-डीजल के दामों में बढ़ोत्तरी या बीमा लागत में वृद्धि के चलते नहीं आई है. अब इस स्थिति में सरकार का दखल जरूरी हो गया है.”

सेन ने सुझाव दिया कि सरकार को सभी वाहनों पर जीएसटी 28 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी करने की जरूरत है. उनके मुताबिक कॉरपोरेट टैक्स भी 30 फीसदी से घटाकर 25 फीसदी करने की जरूरत है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि रिसर्च और डेवलपमेंट निवेश के लिए प्रोत्साहन को बहाल करने के साथ ही ऑटोमोबाइल के संकट से उभरा जा सकता है.