सौदे में देरी पर नौसेना ने अनिल अंबानी की आरएनईएल पर की कार्रवाई

भाषा | December 4, 2018

Anil Ambani's Reliance group withdraws defamation suit

  PTI

नौसेना ने दंडात्मक कार्रवाई करते हुए 3,000 करोड़ रुपये के सौदे में रिलायंस नैवल इंजीनियरिंग लिमिटेड (आरएनईएल) की बैंक गारंटी को भुना लिया है.  नौसेना प्रमुख एडमिरल सुनील लांबा ने तीन दिसंबर को  नई दिल्ली में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि आरएनईएल को कोई तरजीह नहीं दी गयी है.

सूत्रों के अनुसार बैंक गारंटी कुल अनुबंध राशि का 10 प्रतिशत है. रिलायंस नैवल इंजीनियरिंग की ओर से पांच समुद्री गश्ती नौकाओं की आपूर्ति में जरूरत से ज्यादा देरी के लिए नौसेना ने यह कार्रवाई की है. नौसेना ने यह भी कहा है कि वह इस करार की जांच कर रही है.

उन्होंने कहा, ‘‘उसकी बैंक गारंटी को भुना लिया गया है. उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है. इस प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है.’’

नौसेना प्रमुख से कंपनी की ओर से गश्ती नौकाओं की आपूर्ति में अत्यधिक विलंब के बारे पूछा गया था. उनसे यह भी सवाल किया गया कि क्या कंपनी के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करने के लिए किसी तरह का दबाव डाला गया है.

एडमिरल लांबा ने कहा कि यह सौदा अभी रद्द नहीं किया गया है. लेकिन साथ ही उन्होंने कहा कि इस पर गौर किया जा रहा है. उनका संकेत था कि इस मुद्दे पर अंतिम फैसला सरकार करेगी.

उन्होंने बताया कि कंपनी फिलहाल कॉरपोरेट ऋण पुनर्गठन की प्रक्रिया में है.

नौसेना प्रमुख के बयान पर आरएनईएल से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं मिली है.

अनिल अंबानी की रिलायंस डिफेंस 58,000 करोड़ रुपये के राफेल जेट लड़ाकू विमान सौदे को लेकर विवादों के घेरे में है. कांग्रेस ने सरकार पर कंपनी का पक्ष लेने का आरोप लगाया है. हालांकि, कंपनी के साथ ही सरकार भी इन आरोपों का खंडन कर चुकी है.

पांच समुद्री गश्ती जहाजों का 3,000 करोड़ रुपये का मूल करार पिपावाव डिफेंस एंड आफशोर इंजीनियरिंग को 2011 में मिला था. अनिल अंबानी समूह ने 2016 में इस कंपनी का अधिग्रहण कर लिया था. मूल अनुबंध के तहत पहले जहाज की आपूर्ति 2015 के शुरू में की जानी थी. हालांकि, इस समयसीमा को कई बार बढ़ाया जा चुका है.

द वायर के मुताबिक जुलाई 2017 में दो गश्ती नौकाओं की आपूर्ति की गई है. जिसे गुजरात के पिपवाव स्थित रिलायंस नेवल शिपयार्ड से लांच किया गया. लेकिन बाकी के तीन गश्ती नौकाओं की आपूर्ति के बारे में अभी तक स्पष्ट रूप से कुछ भी नहीं कहा गया है.

पिछले कुछ वित्तीय तिमाही में रिलायंस की वित्तीय स्थिति ठीक नहीं रही है. चालू वित्तीय वर्ष की चौथी तिमाही में कंपनी को 409 करोड़ का घाटा हुआ है.


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