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इतिहासकारों की प्रमुख संस्था ने रोमिला थापर से सीवी मांगने पर चिंता जताई

romila thapar selected by american philosophical society without submission of cv

 

इतिहासकारों के प्रमुख एसोसिएशन ने जेएनयू द्वारा प्रख्यात इतिहासकार रोमिला थापर के प्रोफेसर एमिरेटस के पद की समीक्षा करने के कदम पर “गहरी चिंता” जाहिर की है.

अमेरिकन हिस्टोरिकल एसोसिएशन (एएचए) ने कहा कि देश-विदेश के इतिहासकार प्रोफेसर थापर का बहुत सम्मान करते हैं और वो इस पद की हकदार हैं.

एएचए के अध्यक्ष जॉन आर. मेकनिल ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) के वाइस चांसलर एम जगदीश कुमार को लिखा कि “एसोसिएशन रोमिला थापर से उनके पद की समीक्षा के लिए सीवी मांगे जाने के फैसले को खारिज करता है.”

मेकनिल ने पत्र में लिखा कि एएचए इस फैसले पर अपनी चिंता जाहिर करता है. “प्रोफेसर थापर एक प्रख्यात विद्वान हैं और देश विदेश के इतिहासकार उनका बहुत सम्मान करते हैं. उनके अद्वितीय शोध कार्यों को देखते हुए, एसोसिएशन का मानना है कि उनके प्रोफेसर एमिरेटस के पद की समीक्षा की कोई आवश्कता नहीं है.”

12 हजार से ज्यादा सदस्यों के साथ एएचए विश्व में पेशेवर इतिहासरकारों का सबसे बड़ा एसोसिएशन है. भारत के जाने-माने इतिहासकारों में शामिल प्रोफेसर थापर को 2009 में एसोसिएशन में “सम्मानित विदेशी सदस्य” का दर्जा दिया गया था.

ये पत्र एसोसिएशन की आधिकारिक वेबसाइट पर पढ़ा जा सकता है.

मेकनिल ने अपने पत्र में लिखा कि हमने अपने अवॉर्ड में भी उल्लेख किया था कि प्रोफेसर थापर का शुरुआती दक्षिण एशिया के इतिहास पर किया गया काम इस क्षेत्र में बेहद अहम है.

कुछ समय पहले खबर आई थी कि मशहूर इतिहासकार रोमिला थापर से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने सीवी जमा करने को कहा है ताकि वो बतौर प्रोफेसर एमेरिटस पढ़ाना जारी रख सके. कहा गया था कि वो पढ़ाए या नहीं इस पर सीवी देखने के बाद फैसला किया जाएगा.

उल्लेखनीय है कि रोमिला थापर केंद्र सरकार की नीतियों की घोर आलोचक रही हैं.

जेएनयू के तीन वरिष्ठ शिक्षकों ने इस बात पर हैरानी जताई क्योंकि कभी भी किसी एमेरिटस प्रोफेसर से सीवी जमा करने को नहीं कहा गया है. दो शिक्षकों ने कहा कि एक बार चुने जाने के बाद इस पद पर शैक्षिक जीवनभर बना रहता है. वहीं जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (जेएनयूटीए) ने प्रशासन द्वारा बायोडाटा मांगने के फैसले को ‘राजनीतिक रूप से प्रेरित’ बताया था.

थापर करीब छह दशकों से शिक्षक और शोधकर्ता रहीं है. उन्हें प्रारंभिक भारतीय इतिहास में विशेषज्ञता प्राप्त है. जेएनयू में वह वर्ष 1970 से 1991 तक प्रोफेसर रहीं थी. इसके बाद वर्ष 1993 में उन्हें प्रोफेसर एमेरिटा के तौर पर चुना गया था. उन्हें यूएस लाइब्रेरी ऑफ कांग्रेस के प्रतिष्ठित ‘क्लूज पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जा चुका है. यह सम्मान नोबेल पुरस्कार द्वारा कवर नहीं किए गए अध्ययन में जीवन भर की उपलब्धि के लिए दिया जाता है.

इस सोमवार को एएचए ने इतिहासकार रामचंद्र गुहा को सम्मानित विदेशी सदस्य के तौर पर नामित किया था.