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एम्स को अंबेडकर के विचारों से गुरेज है!

aiims is beware by ambedkar's ideas

 

दिल्ली में स्थित भारत के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थान ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) में सामाजिक संबंधों पर अंबेडकर के विचारों को लेकर 13 मई 2019 को एक परिचर्चा का आयोजन होना था, लेकिन संस्थान के अजीबोगरीब रवैये की वजह से यह टल गया. और अब इस पूरे मामले ने एक विवाद का रूप ले लिया है.

दरअसल, एम्स में प्रोफेसर डॉक्टर एलआर मुर्मू ने संस्थान के रजिस्ट्रार को 2 मई 2019 को एक पत्र लिखा था और उनसे उपरोक्त कार्यक्रम के लिए 13 मई 2019 को 4.30 बजे से 6.30 बजे के बीच परिचर्चा कक्ष एलटी-III मुहैया कराने का अनुरोध किया था. लेकिन इसकी अनुमति देते हुए 10 मई 2019 को रजिस्ट्रार की तरफ से जो पत्र जारी हुआ, उसने इस कार्यक्रम को लगभग असंभव बना दिया.

अनुमति-पत्र में जो शर्तें लगाई गईं, उनका पालन करते हुए इस कार्यक्रम को किसी भी सूरत में नहीं कराया जा सकता था. मसलन, कहा गया कि किसी समूह, फोरम या संगठन को इस बात की इजाजत नहीं है कि वो इस कार्यक्रम में भागीदारी करे या इसके आयोजन में हिस्सा ले.

दूसरी शर्त यह थी कि कोई राजनीतिक चर्चा नहीं होगी. और सबसे बड़ी बात यह कि इस कार्यक्रम की कोई मीडिया कवरेज नहीं होगी और कोई प्रेस विज्ञप्ति एम्स के निदेशक की इजाजत के बगैर जारी नहीं होगी. अब ऐसे में सवाल उठता है कि क्या डॉ. बीआर अंबेडकर के विचारों पर कोई सार्वजनिक चर्चा इन शर्तों के साथ संभव है?

आयोजकों का मानना है कि इन शर्तों को लगाने का उद्देश्य इस कार्यक्रम को रोकना था. उन्होंने इसके प्रतिवाद में रजिस्ट्रार को एक तीखा पत्र लिखते हुए कहा कि संविधान के तहत किसी भी लोकतांत्रिक प्रशासन के पैमाने से यह पूरी तरह मनमाना और गैर-कानूनी आदेश है.

इन निर्देशों को उन्होंने प्रेस की स्वतंत्रता, अकादमिक आजादी और बुनियादी अधिकारों पर हमला बताया और इस पत्र को वापस लेने की मांग की. हालांकि लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ऐसा आदेश देने की निदेशक की बात का हवाला देते हुए उन्होंने इस कार्यक्रम को अपनी तरफ से स्थगित कर दिया, लेकिन साथ में यह जोर देकर कहा कि भविष्य में ऐसे कार्यक्रम कराने का अधिकार उनके पास सुरक्षित है.

जब अम्बेडकर से जुड़े कार्यक्रम के मसले को लेकर न्यूज़ प्लेटफार्म ने एम्स के रजिस्ट्रार डॉक्टर संजीव लालवानी से संपर्क किया तो उनका कहना था कि ये सारे निर्देश अकादमिक नियमों के अनुसार जारी किए गए थे. जब उनसे पूछा गया कि इस पत्र को वापस लेने की आयोजकों की मांग पर उन्होंने क्या निर्णय लिया है, तो उनका साफ जवाब था कि अभी तक उन्हें कोई प्रतिवाद पत्र प्राप्त नहीं हुआ है. न्यूज़ प्लेटफार्म ने उनसे 14 मई 2019 को शाम 4 बजकर 5 मिनट पर बात की थी.

दिलचस्प बात यह है कि अभी हाल ही में 22 अप्रैल को एम्स जैसे संस्थान में सोसायटी ऑफ यंग साइंटिस्ट की तरफ से एस्ट्रोलॉजी और मेडिकल सांइसेज विषय पर डॉक्टर प्रवेश व्यास का एक व्याख्यान कराया गया था. व्याख्यान में यह दावा किया गया था कि बीमार व्यक्ति के इलाज में उसकी कुंडली मददगार साबित हो सकती है.

आयोजकों का सवाल है कि अवैज्ञानिक बातों को लेकर एम्स में जब कोई संस्था ऐसे कार्यक्रम कर सकती है तो डॉक्टर अंबेडकर के प्रगतिशील सामाजिक विचारों को लेकर क्यों नहीं?