ट्रंप की कश्मीर पर मध्यस्थता की पेशकश भारत को मंजूर नहीं

trump once again offers to mediate on Kashmir

 

भारत ने कश्मीर पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता के पेशकश एक बार फिर अस्वीकार कर दी है. भारत ने तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दे का समाधान पाकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों से ही निकल सकता है.

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि कश्मीर पर वार्ता की अगर जरूरत पड़ी तो यह केवल पाकिस्तान से होगी और सिर्फ द्विपक्षीय होगी.

एस जयशंकर ने ट्वीट करते हुए कहा, “अमेरिकी समकक्ष पोम्पिओ को आज सुबह स्पष्ट रूप से यह बता दिया गया कि यदि कश्मीर पर किसी वार्ता की आवश्यकता हुई, तो वह केवल पाकिस्तान के साथ होगी और द्विपक्षीय होगी.”

जयशंकर इस समय थाईलैंड की राजधानी में हैं. वह आसियान-भारत मंत्रिस्तीय बैठक, नौवें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में विदेश मंत्रियों की बैठक, 26वें आसियान क्षेत्रीय मंच और 10वें मेकोंग गंगा निगम मंत्रिस्तरीय बैठक समेत कई सम्मेलनों में भाग लेने यहां आए हैं.

इससे पहले ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे पर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता की बात एक बार फिर दोहराई थी. ट्रंप ने कहा कि कश्मीर मुद्दे का समाधान भारत और पाकिस्तान को करना है लेकिन अगर दोनों देशों चाहे तो वो इस मुद्दे पर मध्यस्थता कर सकते हैं.

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ बीते हफ्ते हुई मुलाकात का जिक्र करते हुए ट्रंप ने कहा कि “मुझे उनसे मिलकर बहुत अच्छा लगा है.” उन्होंने कहा कि “मोदी और खान बहुत ही शानदार व्यक्ति है और वो ऐसी उम्मीद या कल्पना करते हैं कि दोनों देश मिलजुल कर रहेंगे.”

ट्रंप ने कहा, “अगर वे कश्मीर मुद्दे पर किसी तरह की मदद या हस्तक्षेप चाहते हैं…मैंने पाकिस्तान पर इस मुद्दे पर बात की है और वास्तव में भारत से भी इस बारे में बात की है. काफी लंबे समय से मामला उलझा है.” उन्होंने कहा, “…अगर वे चाहे तो मैं हस्तक्षेप कर सकता हूं.”

ट्रंप ने अपने बयान में ‘वे’ शब्द का प्रयोग संभव है कि भारत और पाकिस्तान दोनों के लिए किया हो. लेकिन साथ ही संभव है कि वो भारत की ओर इशारा कर रहे हों क्योंकि भारत कश्मीर मुद्दे पर तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप से इनकार करता रहा है. जबकि पाकिस्तान दोनों देशों के बीच इस समस्या के समाधान के लिए पहले भी मध्यस्थता की मांग कर चुका है.

ट्रंप ने बीते दिनों 22 जून को पहली बार मध्यस्थता की बात कही थी. उन्होंने दावा किया था कि प्रधानमंत्री मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्था की मांग की. हालांकि भारत ने इस मुद्दे पर एक बार फिर अपना पक्ष दोहराते हुए ट्रंप के दावों को नकार दिया. भारत ने साफ किया कि पाकिस्तान के साथ सभी मसले द्विपक्षीय संबंधों से ही सुलझ सकते हैं. साथ ही कहा कि संबंधों में बेहतरी के लिए पाकिस्तान को आतंकवाद खत्म करना होगा.

वहीं ट्रंप के बयान से पहले अमेरिका के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी गुरुवार को कहा कि अमेरिका भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंध देखना चाहता है और इसी को देखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कश्मीर मुद्दे के समाधान के लिए ‘सहयोग’ की पेशकश की थी.

अधिकारी ने बताया, “कश्मीर मुद्दे पर जैसा कि मैंने कहा कि हम भारत और पाकिस्तान के बीच संबंधों में सुधार देखना चाहेंगे. इसलिए आपने राष्ट्रपति की सहयोग की पेशकश सुनी थी.”

अधिकारी ने कहा, “हमारा मानना है कि कश्मीर द्विपक्षीय मुद्दा रहा है लेकिन कुछ मौके बने हैं क्योंकि पाकिस्तान ने ऐसे कदम उठाए हैं जो आतंकवाद के खात्मे के लिए उसके अपने प्रयासों में विश्वास बढ़ाते हैं और अंतत: रचनात्मक वार्ता की ओर ले जाते हैं. अगर दोनों पक्ष चाहें तो हम सहयोग के लिए तैयार हैं.”

अधिकारी द्वारा की गई पेशकश पर भारत ने कोई जवाब नहीं दिया है. ऐसा लगा कि अधिकारी की पेशकश के संबंध में ट्रंप को जानकारी नहीं थी और उन्होंने एक संवाददाता से पूछा कि “उन्होंने स्वीकार किया या नहीं?”

संवाददाता द्वारा इनकार करने पर ट्रंप ने जवाब दिया, “खैर ये पूरी तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निर्भर करता है.”


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