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क्या मूर्छित अर्थव्यवस्था को मिलेगी संजीवनी?

 

केंद्र सरकार ने अगले पांच साल के दौरान देश के इन्फ्रास्ट्रक्चर में 102 लाख करोड़ रुपये के निवेश का एलान किया है. इसमें 39 फीसदी निवेश केंद्र को और इतना ही राज्य सरकार को भी करना है. जबकि बाकी 22 फीसदी निवेश निजी क्षेत्र से आना है. अर्थव्यवस्था की मौजूदा हालत को देखते हुए क्या ऐसा हो पाना मुमकिन लग रहा है? क्या केंद्र और राज्यों की सरकारें और निजी क्षेत्र अगले पांच साल में इतना भारी निवेश कर पाने की हालत में हैं? और अगर वो ऐसा नहीं कर पाए तो इस योजना का क्या मतलब रह जाएगा?