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रेलवे का निजीकरण ही आखिरी विकल्प है?

 

सब कुछ बेचने की तैयारी में जुटी मोदी सरकार अब ट्रेनों और रेलवे स्टेशन को भी बेचने की योजना बना चुकी है. इसके लिए नीति आयोग ने सरकार को प्रस्ताव भेजा है. नीति आयोग का कहना है कि 150 ट्रेनों को प्राइवेट सेक्टर को सौंप देना चाहिए. रेलवे में पिछले दरवाजे से निजीकरण की कोशिश पहले भी हुई है लेकिन अबकी बार सरकार रेल के निजीकरण को लेकर आगे बढ़ गई है. सरकार रेलवे को बेहतर बनाने पर निवेश करने की जगह उसे प्राइवेट हाथों में सौंपने की तैयारी क्यों कर रही है? क्या रेलवे का निजीकरण ही आखिरी विकल्प है?