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मंशा है रेलवे का निजीकरण?

 

CAG की रिपोर्ट से जाहिर हुआ है कि रेलवे का संकट बढ़ रहा है. उसकी परिचालन अनुपात लागत 98.44 तक पहुंच गई है. दूसरी तरफ रेल सेवाओं का निजीकरण करने का सरकार का उत्साह बढ़ता ही गया है. इसलिए रेलवे के बढ़ते संकट को देखते हुए ये सवाल उठना लाजिमी है कि सरकार रेलवे को सचमुच संभाल नहीं पा रही है, या वह जानबूझ कर निजीकरण की राह तैयार कर रही है?