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मेघालय: अवैध कोयला खदान धंसने से 13 मजदूर दबे

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  प्रतीकात्मक छवि

एनजीटी समेत तमाम सामाजिक संस्थाओं के लाख प्रयासों के बावजूद अवैध खनन जारी है. पर्यावरण के साथ ही समय-समय पर इसकी बड़ी कीमत बेकसूर मजदूरों को चुकानी पड़ती है. इसी तरह की एक घटना में मेघालय के जयंतिया हिल्स जिले में एक कोयला खदान के धंस जाने से 13 मजदूर फंस गए हैं.

सभी मजदूरों के मारे जाने की आशंका जताई जा रही है.

मजदूरों की तलाश के लिए के लिए राहत एंव बचाव कर्मी लगे हुए हैं. ये खदान जिले के साईपुंग इलाके में स्थित है. इसी इलाके से लिटन नदी गुजरती है. बताया जा रहा है कि लिटन नदी का पानी खदान में घुस गया है. जिसकी वजह से ही ये खदान धंस गई है.

अवैध तरीके से चलाई जा रही इस खदान में ‘रैट होल’ तकनीकि से खुदाई का काम चल रहा था. जबकि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण यानि एनजीटी साल 2014 में ही इस तकनीकि पर रोक लगा चुका है.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी एक खबर के मुताबिक मेघालय के मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने इस दुर्घटना पर खेद जताया है. इसके साथ ही संगमा ने अवैध खनन ने की बात को भी स्वीकारा है.

खबर में संगमा के हवाले से कहा गया है, “इस समय हम ये मानते हैं कि अवैध खनन हो रहा है. अवैध खनन में लिप्त लोगों पर सही वक्त आने पर उचित कार्रवाई की जायेगी.”
खदान में फंसे सभी मजदूर पूर्वी जयंतिया हिल्स और पश्चिमी गारो हिल्स के बताए जा रहे हैं.

पुलिस सूत्रों के मुताबिक खदान के मालिक जेम्स सुखलेन के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है.

इससे पहले बीते नवंबर में अवैध खनन के विरोध में सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता अग्नेस खारशिंग और उनकी सहयोगी पर हमला किया गया था. अग्नेस खनन माफिया के खिलाफ खुलकर बोलते रहे हैं. वह क्षेत्र में एनजीटी की रोक के बावजूद हो रहे खनन के खिलाफ अभियान चला रहे थे.