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राफेल विमान पर सरकार ने कोर्ट में गलत जानकारी दी: मल्लिकार्जुन खड़गे

Mallikarjun Kharge on  rafale

 

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) के प्रमुख मल्लिकार्जुन खड़गे ने राफेल विमान सौदे से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि वह पीएसी के सदस्यों से आग्रह करेंगे कि अटॉर्नी जनरल और नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) को बुलाकर पूछा जाए कि राफेल मामले में कैग की रिपोर्ट पीएसी के सामने कब और कहां आई है.

खड़गे ने आरोप लगाया कि सरकार ने कोर्ट के सामने गलत जानकारी दी कि राफेल मामले में कैग रिपोर्ट पीएसी के सामने रखी गई.

कोर्ट के फैसले में क्या है?

द लीफलेट ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का पैरा-25 को ट्विट करते हुए लिखा है, “केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि राफेल डील संबंधी मामला सीएजी के साथ विचाराधीन है और कोर्ट ने सीएजी के रेफरेंस की गलत व्याख्या कर दी है. सुप्रीम कोर्ट के फैसले के पैरा नंबर 25 में जिस सीएजी रिपोर्ट की बात कही गई है वास्तव में उसका कोई अस्तित्व ही नहीं है.”

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि राफेल डील संबंधी जानकारी सीएजी के साथ साझा की गई है. इस आधार पर सीएजी की ओर से बनाए गए रिपोर्ट को लोक लेखा समिति के समक्ष जांच के लिए रखा गया था.

पैरा 25 में यह भी कहा गया है कि रिपोर्ट का संक्षिप्त हिस्सा ही संसद में रखा गया था. कोर्ट को दिए गए दस्तावेज से पता चलता है कि सरकार ने आधार मूल्य (बेसिक मूल्य) को छोड़कर राफेल एयरक्राफ्ट के मूल्य संबंधी जानकारी साझा नहीं किया है.

खड़गे ने कहा, ”राफेल के बारे में कोर्ट के सामने सरकार को जिन तथ्यों को ठीक ढंग से रखना चाहिए था, वो नहीं रखे गए. अटॉर्नी जनरल ने इस तरह से तथ्यों को रखा उससे कोर्ट को यह महसूस हुआ कि कैग रिपोर्ट संसद में पेश हो गई है और पीएसी ने रिपोर्ट देख ली है.”

उन्होंने कहा, ”जब पीएसी जांच करती है तो साक्ष्यों को देखती है. लेकिन कोर्ट को गलत जानकारी दी गई, जिसके आधार पर गलत निर्णय आया.”

खड़गे ने कहा, ”पीएसी के सदस्यों से आग्रह करने जा रहा हूँ कि अटॉर्नी जनरल को बुलाया जाए और कैग को भी बुलाया जाए ताकि यह पूछा जाए कि यह रिपोर्ट कब आई और पीएसी को कब मिली.”

उन्होंने कहा, ”अगर यह रिपोर्ट नहीं आई तो सरकार ने झूठ क्यों बोला? वह माफी मांगे. सरकार को कैसे क्लीन चिट मिली? किसी तथ्यों को तोड़ा मरोड़ा जाए तो वो ठीक नहीं है.”

उन्होंने कहा कि वो ज्वाइंट पार्लियामेंट्री कमिटी (जेपीसी) की मांग कर रहे हैं ताकि पूरी सच्चाई सामने आ सके.

सुप्रीम कोर्ट ने फ्रांस से 36 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के मामले में नरेंद्र मोदी सरकार को शुक्रवार को एक तरह से क्लीन चिट दे दी. साथ ही कोर्ट ने सौदे में कथित अनियमितताओं के लिए सीबीआई को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने का अनुरोध करने वाली सभी याचिकाओं को खारिज कर दिया.

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस संजय किशन कौल और के एम जोसेफ की पीठ ने कहा कि अरबों डॉलर कीमत के राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई कारण नहीं है.

ऑफसेट साझेदार के मामले पर तीन सदस्यीय पीठ ने कहा कि किसी भी निजी फर्म को व्यावसायिक लाभ पहुंचाने का कोई ठोस सबूत नहीं मिला है.