बेरोजगारी में तेज बढ़ोतरी, 45 साल का रिकॉर्ड तोड़ा: NSSO रिपोर्ट

Team NewsPlatform | January 31, 2019

India's February unemployment rate highest in last four months

 

नेशनल सैंपल सर्वे ऑफिस (एनएसएसओ) की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है. ऑफिस की पीएलएफएस की रिपोर्ट के मुताबिक देश में साल 2017-18 में बेरोजगारी दर पिछले 45 साल में सबसे ज्यादा थी.

बिजनेस स्टैंडर्ड में छपी खबर के मुताबिक, एनएसएसओ की रिपोर्ट में सामने आया है कि देश में साल 1972 के बाद से साल 2017-18 में बेरोगारी की दर सबसे ज्यादा रही.

रिपोर्ट के मुताबिक साल 2011-12 में बेरोजगारी दर 2.2 फीसदी थी. इस दौरान सबसे ज्यादा संख्या में नौजवान बेरोजगार थे, जिनकी संख्या 13 से 27 फीसदी के बीच थी. रिपोर्ट में कहा गया है कि, शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारों की संख्या ज्यादा थी, जो कि 7.8 फीसदी थी. वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में यह दर 5.3 फीसदी थी.

नवंबर 2016 में नोटबंदी के ऐलान के बाद एनएसएसओ का यह पहला वार्षिक घरेलू सर्वेक्षण है.

साल 2011-12 में ग्रामीण पुरूषों (15-29 आयु) में बेरोजगारी दर पांच फीसदी थी, जो 2017-18 में बढ़कर 17.4 फीसदी हो गई. ग्रामीण महिला बेरोजगारी दर की बात करें तो साल 2011-12 में ये 4.8 फीसदी थी जो 2017-18 में बढ़कर 13.6 फीसदी हो गई.

रिपोर्ट में गौर करने वाली बात यह भी है कि ग्रामीण शिक्षित महिलाओं में भी बेरोजगारी दर बढ़ी है.

खबर के मुताबिक, एनएसएसओ की रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रामीण शिक्षित महिलाओं में बेरोजगारी दर साल 2012 से 2018 के बीच 2.1 फीसदी बढ़ी.

रिपोर्ट के मुताबिक, (एलएफपीआर) श्रम बल भागीदारी दर (जनसंख्या में कामगार आयु वर्ग का वो हिस्सा जो नौकरी करना चाहता है) में कमी आई है. एलएफपीआर साल 2004-05 के बीच 39.5 फीसदी था, जो घटकर 36.9 फीसदी रह गया.

दिसंबर महीने में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग द्वारा मंजूरी मिलने के बाद भी सरकार ने अब तक इस सर्वेक्षण के आंकड़ों को जारी नहीं किया है. इसके बाद संस्थान के कार्यवाहक अध्यक्ष पीसी मोहनन और संस्थान की गैर-सरकारी सदस्य जेवी मीनाक्षी ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

दोनों सदस्यों के इस्तीफे की मुख्य वजह यही मानी जा रही है. हालांकि सरकार की ओर से कहा गया है कि 2017 से दिसंबर 2018 तक की अवधि के लिए तिमाही के आंकड़ों को तैयार किया जा रहा है.

गौर करने वाली बात यह है कि कुछ दिन पहले सरकार ने आंकड़ें जारी कर यह बताया कि सितंबर 2017 से नवम्बर 2018 के बीच देश के संगठित क्षेत्र में 1 करोड़ 80 लाख रोजगार पैदा हुए.

हालांकि बहुत सी रिपोर्टों और अध्ययनों में सरकार के इन दावों का खंडन किया गया है.

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन के अनुसार, साल 2018 में भारत की बेरोजगारी दर 3.5 फीसदी रिकॉर्ड की गई है और साल 2019 में यह और बढ़ सकती है. संगठन का मानना है कि साल 2019 में भारत में लगभग 1 करोड़ 90 लाख लोग बेरोजगार रहेंगे.

वहीं, सेंटर फ़ॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनमी (सीएमआईई) ने कहा कि दिसंबर 2018 में भारत की बेरोजगारी दर बढ़कर 7.4 फीसदी हो गई है. सेंटर से जुड़े महेश व्यास बताते हैं कि यह बेरोजगारी दर पिछले 15 महीनों में सबसे ज्यादा है.


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