ये कोरोना-कोरोना क्या है?

coronavirus cases in India

 

हमें कोरोना-कोरोना का डर दिखाने की कोशिश कोई नहीं करे. हम किसी कोरोना-वोरोना से डरते नहीं हैं. आ जाए कोरोना, हमारा क्या बिगाड़ लेगा? हम क्या नास्तिक चीनी हैं जो कोरोना से डरें या म्लेच्छ गोरे, जो किसी दूसरे भगवान पर भरोसा करते हों? कोरोना तो खुद ही हमारे आर्यावर्त में घुसने से पहले सौ बार सोचेगा. वाइरस हुआ तो क्या हुआ, तेजी से फैलने वाला वाइरस हुआ तो क्या हुआ, इंसानों के लिए लाइलाज हुआ तो क्या हुआ, आखिरकार है तो जीवधारी ही. इंसानों से पंगा लेना दूसरी बात है, लेकिन कौन सा जीवधारी होगा जो हमारे देवी-देवताओं से पंगा लेेेने के लिए इस देवभूमि में घुसने की गलती करेगा. फिर एकाध, दो-चार देवी-देवताओं की बात हो तब तो फिर भी कोई वाइरस, निगाह बचाकर घुस आने की सोच भी लेता. यहां तो सौ-दो सौ नहीं, हजार-दो हजार नहीं, लाख-दस लाख नहीं, करोड़ों देवी-देवताओं का बसेरा है. ना एक कम ना एक ज्यादा, पूरे 33 करोड़. फिर कैलाश विजयवर्गीय जी क्यों ना छाती ठोककर कहें कि कोरोना वाइरस से, भारतीयों को कोई खतरा नहीं है, कम से कम असली भारतीयों को नहीं. जो नकली भारतीय बने बैठे हैं, उन्हें पाकिस्तान भेजा जाए या एनआरसी से छान-फटक कर निकाला जाए या कोरोना ले जाए, विजयवर्गीय जी की बला से.

वैसे देखा आपने विजयवर्गीय जी ने कैसे कोरोना के इतने आतंक के बीच भी, अपना नेता धर्म नहीं छोड़ा. केसरिया पार्टी के नेता हैं, तो कोरोना वाइरस को बेशक हिंदू देवी-देवताओं का ही डर दिखाया, लेकिन उस डर का इस्तेमाल कर के बचाया किसे–भारतीय पब्लिक को. इसे सेकुलरिस्टों की वोट बैंक की राजनीति से कोई ना मिलाए, यह तो सच्ची आस्था का यानी शुद्घ देशभक्ति का मामला है. सच्ची आस्था रखने वाला क्या कभी यह मान सकता है कि हमारे देवी-देवता वाइरस से, चाहे वह कोरोना ही क्यों न हो, सिर्फ अपनी ही रक्षा करेंगे? भगवान क्या अपने भक्तों को बिल्कुल ही नहीं बचाएंगे? फिर विजयवर्गीय जी ने भक्तों को बचाने का ऐसा कोई बहुत ज्यादा बोझ भी तो भगवान पर नहीं डाला है.

अगर हिंदू-मुसलमान में अंतर नहीं भी करें और पूरे एक सौ तीस करोड़ भारतीयों को बचाने जाएं, तब भी 33 करोड़ देेवी-देवताओं में से हरेक के हिस्से में मुश्किल से चार हिंदुस्तानी आएंगे. और सिर्फ अपने ऊपर आस्था रखने वालों को बचाने जाएं, तब तो सिर्फ तीन. हमारे देवी-देवता क्या इतने कमजोर हैं कि चीन से पिट गए कोरोना वाइरस से, भारत में तीन-चार लोगों को भी नहीं बचा सकते हैं.

फिर भी, ये वाइरस देवी-देवताओं की नजरों से बचकर अगर हमारे आर्यावर्त में प्रवेश कर भी गया, तब भी चिंता की कोई बात नहीं है. दुनिया कोरोना का टीका खोजने में हलकान हो रही है तो होती रहे, हमारे पास तो हमेशा से ऐसे सभी वाइरसों का अचूक टीका है. जी हां वही–हमारा पुराना गोमूत्र. आए कोराना, अपने आर्यावर्त में उसका स्वागत हम गोमूत्र से करेंगे. स्वागत, माने सचमुच स्वागत! सरकारेें गैर-जरूरी मेल-मुलाकात, भीड़-भाड़ से बचने की सलाहें देती रहें, हम तो गोमूत्र पार्टियां करेंगे. गोमूत्र के शॉट लगाएंगे और कोरोना को दूर भगाएंगे! देश की राजधानी से शुरूआत हो गई है. आगे-आगे हम देश भर में गोमूत्र पार्टियां कराएंगे और कोरोना को तो भगाएंगे ही, कोरोना से बचाव का सारा का सारा खर्चा बचाएंगे. मॉस्क, सैनीटाइजर, दवाओं वगैरह का बाकी दुनिया को निर्यात कर के पैसा कमाएंगे, सो ऊपर से. गोमूत्र सलामत रहे, हमें कोरोना के बाद अब 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने से कोई नहीं रोक सकता है.

हिम्मत है तो आए करोना वाइरस, हम भक्त उसे छठी का दूध याद करा देंगे. हम दिखा देंगे कि हमने भी गो-माता का मूत पिया है. एक जमाना था जब जन्म देने वाली मां का दूध पीने के बल पर लड़ते थे, मां के दूध की कसमें खाते थे. लेकिन अब हम तरक्की कर चुके हैं. ये नया इंडिया है. अब हम गाय-मां का मूत पीने के बल पर लड़ते हैं; सिर्फ एंटीनेशनलों से ही नहीं बल्कि हर तरह की बीमारियों और तमाम वाइरसों से भी. और जब हम गाय का मूत पीकर और 33 करोड़ देवी-देवताओं की छतरी के नीचे, कोरोना जैसे वाइरस को हरा सकते हैं, तो क्या अधर में लटकी कमलनाथ की सरकार को नहीं गिरा सकते हैं? अब मुश्किल की क्या बात है, जब पूरा सिंधिया घराना केसरिया भाइयों के साथ है. अपनों को दगा देकर, दुश्मनों को गद्दी पर बैठवाने की तो इस घराने में पुरानी परंपरा है. यानी नफे का नफा और परंपरा का पालन भी.

वैसे भी जिस देश में सांप्रदायिकता का वाइरस टूटकर फल-फूल रहा हो, उसका कोई कोरोना वाइरस क्या बिगाड़ लेगा? उल्टे आए कोरोना वाइरस, हमें अपना विश्व गुुरूपना दिखाने का ही मौका मिलेगा. देख लीजिएगा, अपने पीएम जी कैसे टेली कान्फ्रेंसिंग कर-कर के इस मौके पर भी सारी दुनिया में अपनी भाषण कला के झंडे गाढ़ते हैं और योगा के बाद अब नमस्ते का भारत का संदेश सारी दुनिया में फैलाते हैं.


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Arun Pandiyan Sundaram

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