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बैंकॉक: आज आसियान समिट में हिस्सा लेंगे प्रधानमंत्री मोदी

pm modi reaches bangok amid rcep talks

 

प्रधानमंत्री 16वें आसियान-भारत शिखर सम्मेलन, 14वें पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन और आरसीईपी की तीसरी शिखर बैठक में भाग लेंगे.

उन्होंने भारत-आसियान शिखर सम्मेलन के बारे में कहा, ”मैं आसियान भागीदारों के साथ अपनी सहयोगी गतिविधियों के अलावा आसियान एवं आसियान के नेतृत्व वाले तंत्र को मजबूत करने, संपर्क (समुद्र, भूमि, वायु, डिजिटल और लोगों का लोगों से) बढ़ाने एवं आर्थिक भागीदारी को और मजबूत करने तथा समुद्री सहयोग का विस्तार करने से संबंधित योजनाओं की भी समीक्षा करूंगा.”

बहु-प्रतीक्षित क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक भागीदारी (आरसीईपी) को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत के अंतिम दौर में पहुंचने के बीच सबकी निगाहें भारत की ओर लगी हैं कि क्या वह 16-एशिया प्रशांत देशों से जुड़े दुनिया के सबसे बड़े व्यापारिक समझौते के लिए सहमत होगा.

कई राजनयिक सूत्रों ने पीटीआई से पुष्टि की है कि सोमवार को बैंकाक के नोंथबरी में शिखर बैठक के दौरान भारत को छोड़कर, सभी 15 आरसीईपी सदस्य देश इस सौदे को अंतिम रूप देने के लिए सहमत थे.

प्रस्तावित समझौते पर विभिन्न बैठकों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि उम्मीद से ज्यादा व्यापार घाटे को लेकर भारत की चिंताओं का समाधान करना महत्वपूर्ण है और भारत के विशाल बाजार को खोले जाने के साथ उन क्षेत्रों में भी खुलापन होना चाहिए जहां भारतीय कारोबारियों को लाभ हो सकता है. वह आरसीईपी के साथ ही अगले तीन दिनों में नोंथबरी में दो अन्य महत्वपूर्ण शिखर सम्मेलनों में भाग लेंगे.

मोदी ने ”बैंकाक पोस्ट” अखबार के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ”हमने स्पष्ट तरीके से उचित प्रस्ताव सामने रखे हैं और गंभीरता के साथ बातचीत में शामिल हैं. हम अपने कई सहयोगियों की महत्वकांक्षाओं के अनुरूप सेवाओं का स्तर चाहते हैं , यहां तक कि हम उनकी समस्याओं के समाधान के लिए तैयार हैं.’

उन्होंने कहा, ‘कुल मिलाकर, हमारा रुख स्पष्ट है कि परस्पर रूप से लाभकारी आरसीईपी, जिसमें सभी पक्षों को यथोचित लाभ हो, भारत और वार्ता में शामिल सभी भागीदारों के हित में है.’

मोदी ने यहां की अपनी यात्रा से पहले नयी दिल्ली में एक बयान में कहा, ”आरसीईपी शिखर सम्मेलन के दौरान हम आरसीईपी वार्ता में प्रगति की समीक्षा करेंगे. हम इस शिखर सम्मेलन के दौरान माल, सेवाओं और निवेशों में भारत की चिंताओं और व्यापार हितों सहित सभी मुद्दों को पूरी तरह से समायोजित किया जा रहा है.

विवादित दक्षिण चीन सागर के साथ ही हिंद- प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक व्यवहार की पृष्ठभूमि में 10 प्रभावशाली देशों के समूह आसियान का वार्षिक शिखर सम्मेलन हो रहा है. इस शक्तिशाली समूह के भारत, अमेरिका, जापान, रूस और चीन जैसे वार्ता भागीदारों के साथ अलग-अलग शिखर सम्मेलन होंगे.

भारत के साथ आसियान क्षेत्र की आबादी 1.85 अरब है जो दुनिया की कुल आबादी का एक चौथाई है. उसकी (आसियान क्षेत्र की) संयुक्त जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) 3.8 ट्रिलियन अमेरिकी डालर रहने का अनुमान है. आसियान से पिछले 17 वर्षों में भारत में निवेश 70 अरब डालर से अधिक रहा है जो भारत के कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का 17 प्रतिशत से अधिक है.

प्रधानमंत्री भारत-आसियान और आरसीईपी शिखर सम्मेलनों में भाग लेने के अलावा वार्षिक पूर्वी एशिया शिखर सम्मेलन में भी भाग लेंगे जिसमें आतंकवाद और कट्टरपंथ के खतरों से निपटने के तरीकों पर विचार-विमर्श करने के अलावा क्षेत्र के सुरक्षा परिदृश्य की समीक्षा किए जाने की उम्मीद है.