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…वे भारतीय सिनेमा में संगीत के कारीगर थे

music composer mohammed zahur khayyam

 

मशूहर संगीतकार खय्याम ने अपने संगीत से हिन्दी सिनेमा के गीतों में जान डाल दी. उनका जन्म 18 फरवरी 1927 को पंजाब में हुआ था. खय्याम का पूरा नाम मोहम्मद जहूर खय्याम हाशमी था, लेकिन उन्हें हर कोई खय्याम नाम से जानता था.

खय्याम को संगीत को शौख बचपन से ही था. वे परिवार वालों से छुपकर फिल्में देखने जाते थे. उनका फिल्में देखना परिवार वालों को पसंद नहीं आया और खय्यम को घर से बाहर निकाल दिया गया. संगीत का शौक खय्याम को मुबंई खींच लाया.

खय्याम ने संगीत की शिक्षा बाबा चिश्ती से ली थी. उन्होंने अपने करियर की शुरुआत साल 1947 में की थी. उन्हें साल 1948 में फिल्म हीर रांझा का एक गाना मिला. इस फिल्म का गाना, ‘अकेले में वो घबराते तो होंगे’ बहुत मशूहर हुआ. इस गाने से खय्याम को एक अलग मुकाम हासिल हुआ.

इससे बाद उन्हें एक के बाद एक गाने मिलते जा रहे थे. ‘उमराव जान’ को तो कौन भूल सकता है. गुल बहार, फिर सुबह होगी, शगुन, आखिरी खत, त्रिशूल, नूरी, थोड़ी सी बेवफाई, चंबल की कसम, खानदान जैसे फिल्मों में गीतों को संगीत दे कर खय्याम ने सदाबाहर बना दिया.

खय्याम को कई पुरस्कारों से सम्मान किया गया. साल 2007 में उन्हें संगीत नाटक अकादमी अवॉर्ड दिया गया. साल 2011 में उन्हें पद्म भूषण से नवाजा गया.  साल 1977 में कभी कभी के लिए, साल 1982 में उमराव जान के लिए फिल्‍मफेयर दिया गया और साल 2010 में उन्‍हें लाइफ टाइम अचीवमेंट अवार्ड से नावाजा गया.