कोरोना से तबाही की कगार पर MSME सेक्टर

Team NewsPlatform | May 6, 2020

 

कोरोना वायरस का अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र पर खराब असर पड़ा है लेकिन इसका सबसे बुरा असर सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्योगों (एमएसएमई सेक्टर) पर पड़ा है. देश में बिना काम के फंसे हुए लाखों मजदूर इस बात की गवाही देते हैं. यह बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार के पहले राहत पैकेज की तरह दूसरे पैकेज में भी इस क्षेत्र को प्राथमिकता दी जाएगी.

शहरी और ग्रामीण इलाकों को मिला दें तो एमएसएमई सेक्टर में 11 करोड़ से कुछ अधिक लोग काम करते हैं. ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत में एमएसएमई सेक्टर के 6.34 करोड़ एंटरप्राइज हैं. इनमें से 51 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं लेकिन कुल रोजगार का 55 प्रतिशत हिस्सा शहरों में है.

एमएसएमई सेक्टर में 99.5 प्रतिशत एंटरप्राइज सूक्ष्म श्रेणी में आते हैं और ये सभी ग्रामीण क्षेत्रों में हैं. इनमें केवल एक व्यक्ति ही अपने घर से काम करता है. बाकी के 0.5 प्रतिशत लघु और मध्यम एंटरप्राइज में पांच करोड़ लोगों को रोजगार मिला हुआ है और इनमें से ज्यादातर एंटरप्राइज शहरों में हैं.

एमएसएमई सेक्टर के ज्यादातर एंटरप्राइज कहीं भी रजिस्टर नहीं हैं. ज्यादातर सूक्ष्म एंटरप्राइज तो जीएसटी स्लैब में भी नहीं आते. इससे उनको फायदा जरूर होता है लेकिन संकट के समय में नुकसान होता है क्योंकि रजिस्टर ना होने पर सरकार की तरफ से उन्हें सहायता पहुंचाना मुश्किल है.

कोरोना की वजह से एमएसएमई सेक्टर पर बहुत बुरा असर पड़ा है. कोटक इन्सटीट्यूशनल इक्विटीज के सुवोदीप रक्षित कहते हैं कि एमएसएमई सेक्टर पहले से ही राजस्व और पूंदी की कमी से जूझ रहा था. लॉकडाउन ने परिस्थितियां ऐसी कर दी हैं कि अब ज्यादातर एंटरप्राइज के अस्तित्व पर ही बन आई है. ये ऐसी एंटरप्राइज नहीं है जिनके पास बहुत सारा कैश है. लॉकडाउन की वजह से ज्यादातर एंटरप्राइज अपनी क्षमता का केवल 7 प्रतिशत ही उत्पादन कर रही हैं. इसलिए इस क्षेत्र से बहुत सारी नौकरियां भी गई हैं.

फिलहाल रिजर्व बैंक ने एमएसएमई सेक्टर में पैसा डालने का निर्णय लिया है. वहीं क्रिसिल की निदेशक हेतल गांधी का मानना है कि इस क्षेत्र की मदद करना इतना आसान नहीं होने वाला है. उनका कहना है कि सरकार इस क्षेत्र को टैक्स छूट दे सकती है, त्वरित रिफंड के साथ ग्रामीण इलाकों में लिक्विडिटी बढ़ा सकती है ताकि इस क्षेत्र के उत्पादों की मांग बढ़े.

इधर केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने एमएसएमई क्षेत्र के लिए जल्द ही राहत पैकेज जारी किए जाने की उम्मीद जताई है.

उन्होंने कहा, “सरकार में इस स्थिति को लेकर पूरी गंभीरता से विचार किया जा रहा है और हम अपने स्तर पर हर संभव प्रयास कर रहे हैं. हम सभी संबंद्ध पक्षों से बातचीत कर रहे हैं और विभिन्न विभागों के बीच एक दूसरे से भी विचार विमर्श किया जा रहा है. हम एमएसएमई क्षेत्र के लिये एक बेहतर पैकेज पाने के लिये हर संभव प्रयास कर रहे हैं. इस क्षेत्र में समस्या काफी गंभीर है और हम ऐसे में उनका समर्थन कर रहे हैं.”


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