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मप्र डायरी: बीजेपी की संकल्प यात्राएं बनाम दिग्विजय का गांधी मार्ग

digvijay singh statement on the hindutwa

 

महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर दो अक्टूबर से भारतीय जनता पार्टी ने लोकसभा क्षेत्रों में गांधी संकल्प यात्राओं का आयोजन शुरू किया है. यात्राओं का नेतृत्व सांसद कर रहे हैं.

दूसरी तरफ, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राज्यसभा सदस्य दिग्विजय सिंह का ‘गांधी मार्ग’ चर्चा में है. दिग्विजय सिंह के दौरा कार्यक्रम के साथ एक टीप जोड़कर दी जा रही है. इसमें कहा गया है कि उनके मुख्य आतिथ्य में होने वाले कार्यक्रमों की शुरुआत प्रारंभ में गांधीजी के प्रिय भजन ‘रघुपति राघव राजाराम, ईश्‍वर अल्ला तेरे नाम’ के गायन से हो. यदि गायक न मिले तो यू-टयूब से उस भजन को डाउनलोड कर उसे बजाने का प्रबंध किया जा सकता है.

सभी श्रोता अपने स्थान पर बैठे हुए अपनी-अपनी आस्था के अनुसार अथवा अपने आराध्य या महापुरुष का स्मरण करते हुए एक मिनट का मौन धारण करें उसके पश्‍चात ही विधिवत कार्यक्रम प्रारंभ होगा. इसके साथ ही उन्होंने फूलमाला व गुलदस्तों के स्थान पर गांधीजी की विचारधारा के अनुरुप स्वागत केवल सूत की माला से करने और एक व्यक्ति द्वारा ही स्वागत करने पर बल दिया है.

हिदायत दी गई है कि बैनर एवं फ्लैक्स पर उनके चित्र न लगाएं, ढोल, आतिशबाजी आदि का प्रयोग न करें और उनके नाम की नारेबाजी न करें. वे मंच पर नहीं बैठेंगे, मंच पर केवल मंच संचालक रहें और संचालक द्वारा आमंत्रित वक्ता ही मंच पर पहुंचे. सम्मान समारोह के दौरान सम्मानित किए जाने वाले महानुभावों और सम्मान करने वाले महानुभावों को ही मंच पर आमंत्रित करें. दिग्विजय सिंह के ये निर्देश राजनीति की नई दिशा तय कर रहे हैं.

झाबुआ में पाक याद आया,रोजगार की बात भी नहीं

मध्यप्रदेश के झाबुआ विधानसभा में इस माह के अंत में उपचुनाव होना है मगर यहां स्थानीय मुद्दों और समस्याओं पर राजनेताओं का ध्यान नहीं गया. बीजेपी की पहली बढ़ी सभा में प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान की मौजूदगी में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने भारत-पाक की बात कर माहौल गर्माने की कोशिश की.

नेता प्रतिपक्ष गोपाल भार्गव ने मंच से कहा था कि “अगर झाबुआ से कांग्रेस प्रत्याशी की जीत हुई तो ये जीत पाकिस्तान की होगी, इसीलिए बीजेपी को वोट दें.” जवाब में कांग्रेस प्रत्याशी कांतिलाल भूरिया ने कहा है, “बीजेपी राम मंदिर का अरबों रुपया खा गई. जब चुनाव आते हैं तो बीजेपी राम मंदिर की बात करने लगती है.”

नेता यह भूल गए कि पश्चिमी मध्यप्रदेश के कई जिलों में हालात ठीक नहीं हैं. आदिवासी बहुल झाबुआ जैसे जिलों के आदिवासी ग्रामीण काम की तलाश में पड़ोसी गुजरात व राजस्थान में पलायन करने को मजबूर हैं. झाबुआ की जनसंख्या 10,25,048 है, जिसमें चार लाख से अधिक लोग सालभर में पलायन करते हैं. क्षेत्र में आदिवासियों का पलायन, पानी की समस्या बड़ा मुद्दा है. अलीराजपुर जैसे आदिवासी बहुल इलाकों में डोलोमाइट के पत्थर बड़ी मात्रा में हैं. पत्थरों को पीसने के कारखाने हैं. इस खदानों से इलाके के लोगों को रोजगार कम फ्लोरोसिस और सिलिकोसिस जैसी बीमारियां ज्यादा मिलीं हैं. ये मुद्दे चुनाव से गायब हैं.

सबका साथ, सबका विकास से मध्य प्रदेश गायब

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार देश की बागडोर संभालने के बाद लोगों को भरोसा दिलाया था कि अब सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्‍वास उनकी राजनीतिक शैली का मूलमंत्र होगा. देश के अधिकांश राज्यों में भारी बरसात के कारण तबाही का मंजर पैदा हो गया है, यहां सभी जगह प्रभावित राज्यों की एक सी समस्या है, लेकिन जिस ढंग से केन्द्र सरकार उदारतापूर्वक कुछ ही राज्यों को, जो उसके या उसके सहयोगियों के साथ सत्ता में हैं उन्हें तो फौरी राहत प्रदान कर रही है और उसने तत्काल जिस प्रकार की मदद बिहार व कर्नाटक को है वैसी कोई फौरी मदद अभी मध्य प्रदेश की नहीं की है.

अभी केंद्र सरकार ने बिहार और कर्नाटक में बाढ़ पीड़ितों की मदद के लिए 1813 करोड़ रुपये की अग्रिम सहायता राशि को मंजूरी दे दी है. राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया कोष (एनडीआरएफ) के फंड से बिहार के लिए 400 करोड़ और कर्नाटक के लिए 1200 करोड़ की सहायता राशि को मंजूरी दी गई है. मध्य प्रदेश सहित अन्य गैर-बीजेपी शासित राज्यों को अतिरिक्त आर्थिक सहायता का इंतजार है.

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने प्रधानमंत्री मोदी से मिलकर फौरी तौर पर 9000 करोड़ रुपये की तत्काल सहायता देने और दोबारा केंद्रीय अध्ययन दल को भेजने का आग्रह किया है, इसका क्या नतीजा निकला यह तो कुछ दिनों बाद पता चलेगा लेकिन तत्काल किसी भी राशि की मदद की घोषणा नहीं हुई है. मध्य प्रदेश में बाढ़ के कारण 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है यही कारण है कि कमलनाथ ने दूसरी बार केंद्रीय अध्ययन दल मध्य प्रदेश में भेजने का प्रधानमंत्री से आग्रह किया है. उन्हें फिलहाल आश्वासन मिला है.