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छह जून तक केरल पहुंचेगा मानसून: मौसम विभाग

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भारतीय मौसम विभाग ने कहा है कि दक्षिणी-पश्चिमी मानसून थोड़ी सी देरी के साथ छह जून को केरल पहुंचेगा. सामान्यत: इस मानसून के केरल पहुंचने की तारीख 1 जून होती है. इससे पहले मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली एक निजी एजेंसी स्काईमेट ने घोषणा की थी कि दक्षिणी-पश्चिमी मानसून 4 जून को केरल पहुंचेगा.

भारतीय मौसम विभाग ने मानसून का पूर्वानुमान लगाने के लिए एक कस्टमाइज्ड मॉडल का प्रयोग किया है. विभाग का कहना है कि 2014 के बाद से केवल एक ही बार 2015 में इस मॉडल का पूर्वानुमान गलत निकला है.

इस मॉडल में मुख्य रूप से छह पहलुओं पर ध्यान दिया जाता है. इस मॉडल में चार दिन का एरर-मार्जिन रखा जाता है. मतलब अगर विभाग ने छह जून को मानसून के आने का दिन बताया है, तो एरर-मार्जिन के हिसाब से मानसून दो से 10 जून के बीच भी आ सकता है.

भारतीय मौसम विभाग ने कहा, “अंडमान सागर के दक्षिणी भाग, निकोबार द्वीप और उससे जुड़ी हुए बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी-पूर्वी हिस्से में 18-19 मई को ही दक्षिणी-पश्चिमी मानसून को लेकर सकारात्मक स्थितियां बनने लगी थीं.”

मौसम विभाग ने कहा कि इस बार मानसून सामान्य ही रहेगा, हलांकि इसके सामान्य से नीचे रहने की भी संभावनाएं हैं.

इससे पहले स्काईमेट के सीईओ जतिन सिंह ने कहा था, “अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में मानसून 22 मई को पहुंचेगा. दक्षिण पश्चिम मानसून 2019 केरल में चार जून को दस्तक दे सकता है.”

उन्होंने कहा था, “इस मौसम में सभी चार क्षेत्रों में सामान्य से कम बारिश होने जा रही है. पूर्व और पूर्वोत्तर भारत तथा मध्य हिस्से बारिश के मामले में उत्तर पश्चिम भारत और दक्षिणी प्रायद्वीप से खराब स्थिति में रहेंगे. मानसून की शुरुआत चार जून के आसपास होगी. ऐसा लगता है कि भारतीय प्रायद्वीप में मानसून का शुरुआती चरण धीमा होने जा रहा है.”

स्काईमेट के अनुसार, बारिश के सामान्य से कम होने की उम्मीद 55 प्रतिशत है जिसका अल नीनो पर प्रभाव पड़ेगा.

इसके अनुसार, सभी उत्तर भारत राज्यों वाले उत्तर पश्चिम भारत में लॉन्ग पीरियड एवरेज (एलपीए) की 96 प्रतिशत बारिश होगी जो कि सामान्य और सामान्य से कम बारिश की श्रेणी में आता है.