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उद्योगपतियों के लिए पर्यायवरण को नष्ट करने की फिराक में है मोदी सरकार

modi govt moved to ammend environment assesment notification

 

देश में जब लोकसभा चुनाव हो रहे हैं, तब मोदी सरकार ने बहुत तेजी से इनवायरमेंट असेसमेंट नोटिफिकेशन 2006 को संशोधित करने के लिए कदम उठाया है.

15 अप्रैल को केंद्र सरकार ने इनवायरमेंट असेसमेंट नोटिफिकेशन 2019 का जीरो ड्राफ्ट सभी राज्यों को टिप्पणी के लिए भेजा ताकि उनकी राय जानकर इनवायरमेंट असेसमेंट नोटिफिकेशन 2019 का फाइनल ड्राफ्ट तैयार किया जा सके. पत्रकार मयंक अग्रवाल ने अपने ट्विटर हैंडल पर इसकी जानकारी दी है.

पत्रकार मयंक अग्रवाल का कहना है कि केंद्र सरकार का यह कदम बड़े उद्योगपतियों के पक्ष में और पर्यायवरण तथा आम लोगों के खिलाफ है.

इनवायरमेंट असेसमेंट नोटिफिकेशन 2006 में ऐसे प्रावधान हैं जो थर्मल, हाइड्रो, माइनिंग और इन्फास्ट्रक्चर से जुड़े हुए प्रोजेक्ट्स को मूल्यांकन के बाद अनुमति देते हैं ताकि इनकी वजह से पर्यायवरण को नुकसान ना पहुंचे.

पर्यायवरण मंत्रालय का कहना है कि पिछले 13 सालों में इनवायरमेंट असेसमेंट नोटिफिकेशन 2006 में कई ठोस बदलाव हो चुके हैं, इसलिए इस पूरे समय में इसके आदेशों/संशोधनों को लागू करने के दौरान हासिल अनुभवों के आधार पर मंत्रालय ने इस नोटिफिकेशन की पुनर्चना करने का निर्णय लिया है.

पत्रकार मयंक अग्रवाल कहते हैं कि कई विशेषज्ञों ने इस जीरो ड्राफ्ट को देखा है और उन्होंने पाया है कि पर्यायवरण मंत्रालय 2006 के नोटिफिकेशन के उन सभी संशोधनों को वापस ला रहा है, जिन्हें समय-समय पर विभिन्न अदालती फोरम्स ने उपयुक्त कारणों की वजह से पूरी तरह से समाप्त कर दिया था.

मयंक अग्रवाल ने कहा है कि पर्यायवरण मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक मंत्रालय को इस बात का संज्ञान है कि केंद्र सरकार का यह कदम विवादास्पद है और भविष्य में इसे लेकर न्यायिक समीक्षा हो सकती है. इसके अलावा नई सरकार सभी हितधारकों से विचार-विमर्श करके ही इसे अंतिम स्वरूप दे पाएगी.

इन सभी बातों के आधार पर पत्रकार मयक अग्रवाल ने निष्कर्ष निकाला है कि भविष्य में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के नाम पर उद्योगपतियों के मुनाफे के लिए पर्यायवरण के हित में बने प्रावधानों को ताक पर रखा जा सकता है.