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मप्र डायरी: बीजेपी को मुद्दाविहीन करने में जुटी कमलनाथ सरकार

twenty two rebel mp congress joins bjp

 

मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में इन दिनों सरकार धार्मिक मामले पर बीजेपी को मुद्दाविहीन करने में जुटी है. कमलनाथ ने मठ-मंदिरों के उन्नयन और धार्मिक पर्यटन विकसित करने का टारगेट सेट कर सरकार की दिशा तय कर दी है. इसका मकसद हिंदुत्व के मुद्दे पर बीजेपी के लिए जवाब तैयार करना है.

पिछले कई वर्षों से कांग्रेस नेता असमंजस में थे कि वे इस मोर्चे पर बीजेपी के प्रचार का जवाब कैसे दें? पार्टी में अलग अलग फोरम पर मांग उठ रही थी कि कांग्रेस को उदार हिंदुत्व की अपनी पुरानी विचारधारा पर आगे बढ़ना चाहिए. विधानसभा चुनाव के पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने जब नर्मदा यात्रा की थी तब जनसमर्थन को देखते हुए वर्तमान वित्तमंत्री और तब के कांग्रेस विधायक तरुण भनोत अपने समर्थकों के साथ यात्रा में शामिल हुए थे. यह उनका बीजेपी के मुद्दे को शिथिल करने का ‘काउंटर टूल’ था. सरकार ने भी ऐसे ही टूल को अपना लिया है.

कमलनाथ सरकार तेजी से राम वन गमन पथ को एक धार्मिक पर्यटन के रूप में विकसित कर रही है. इसके साथ ही आध्यात्म विभाग का गठन किया गया है. मंदिरों में पूजा-अर्चना करने वाले पुजारियों की बेहतरी के लिए नीतियों को नए सिरे से निर्धारित किया करने साथ ही पुजारियों का मानदेय तीन गुना कर दिया गया है.

मंदिर व मठों की व्यवस्था के सुचारु संचालन के लिए मठ-मंदिर सलाहकार समिति का भी गठन किया गया है. विभिन्न मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए राशि प्रदान की गई है. तीर्थ दर्शन के लिए तीन विशेष ट्रेनें चलाई गई हैं. अब नगरीय विकास एवं आवास मंत्री जयवर्द्धन सिंह ने भी एलान किया है कि स्थानीय निकाय संस्थाएं अपने-अपने क्षेत्र में रामलीला मंचन के लिए मंच तैयार करेंगी ताकि इसके मंचन में किसी प्रकार की असुविधा न हो. एक हजार गौशालाओं के निर्माण का फैसला कमलनाथ सरकार काफी पहले ही कर चुकी है.

उज्जैन के महाकालेश्‍वर मंदिर के बाद अब ओंकारेश्‍वर को विकसित करने के लिए 156 करोड़ की कार्ययोजना को मंजूरी प्रदान करते हुए कमलनाथ ने निर्देश दिए हैं कि ओंकारेश्‍वर मंदिर के लिए शीघ्र ही एक विधेयक तैयार किया जाए. इन मुद्दों पर बीजेपी फिलहाल खामोश है.

प्रज्ञा के साथ अब भी नहीं बीजेपी!

सभी जानते हैं कि भोपाल लोकसभा चुनाव में प्रज्ञा ठाकुर को प्रत्याशी बनाये जाने से स्थानीय और प्रादेशिक नेता खुश नहीं थे. संघ की पसन्द होने के कारण खुलकर विरोध नहीं हुआ मगर अपेक्षित सहयोग भी नहीं किया गया था. फिर अपने बयानों से पार्टी की किरकिरी करवाने के कारण बीजेपी नेताओं ने सांसद प्रज्ञा ठाकुर से दूरी बनाए रखी. यह दूरी गुजरे सप्ताह फिर दिखाई दी जब जलाने की धमकी देने वाले कांग्रेस विधायक गोवर्धन दांगी के बयान पर एफआईआर दर्ज कराने सांसद प्रज्ञा सिंह ठाकुर भोपाल के कमला नगर थाने पहुंची.

एफआईआर नहीं लिखी गई तो प्रज्ञा थाने के बाहर धरना पर बैठ गईं. पुलिस का कहना था कि मामला उनके थाना क्षेत्र का नहीं है लिहाजा एफआईआर नहीं लिखी जा सकती.

एफआईआर दर्ज करना तो अलग बात हुई मगर साफ तौर पर देखा गया कि स्थानीय बीजेपी नेताओं ने उनसे दूरी बना कर रखी. बीजेपी जिलाध्यक्ष विकास विरानी जरूर प्रज्ञा सिंह ठाकुर के साथ रहे मगर उनके अलावा कोई भी नेता थाने में नजर नहीं आया. यह प्रज्ञा की छवि ही है कि कोई भी उनके साथ खड़े होने का जोखिम नहीं उठाना चाहता.

शिवराज की भाषा को आखिर हुआ क्या है?

पूर्व मुख्यमंत्री और बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान की छवि कट्टर नेता की नहीं बल्कि वे अटल बिहारी वाजपेयी की तरह सॉफ्ट नेता माने जाते हैं. मगर पिछले कई दिनों से उनकी भाषा में तल्खी झलक रही है. कभी मंच से कलेक्टर को काम नहीं करने पर ‘टांग दूंगा’ कहने वाले शिवराज ने सागर में कहा कि, ‘कमलनाथ तू किस खेत की मूली है.’ इस पर कांग्रेस ने खासा ऐतराज जताया.

उच्च शिक्षा मंत्री और प्रदेश कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कहा कि ये शिवराज सिंह चौहान की भाषा तो नहीं थी. सत्ता जाने के बाद शिवराज सिंह की निराशा में उनकी भाषा अभद्र और अमर्यादित हो गई है. वह नेगेटिव हो गए हैं. खास बात यह है कि शिवराज की इस नेगेटिविटी को उनकी पार्टी के नेता भी पढ़ रहे हैं.