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2018: भारतीय तेज गेंदबाजों के लिए सुनहरा साल

indian cricket team's fast bowling is in golden era

 

भारतीय क्रिकेट टीम इस समय ऑस्ट्रेलिया के दौरे पर है. जहां वह चार टेस्ट मैचों की सीरीज में 2-1 की अपराजेय बढ़त ले चुकी है. भारतीय टीम का यह प्रदर्शन हालिया फार्म को देखते हुए भले ही चौंकाने वाला ना लगे, लेकिन इस जीत का महत्व बाकी जीतों से कहीं बड़ा है.

पहली बात, देश से बाहर बेहतर प्रदर्शन ना कर पाने का जो पुराना दाग लगा हुआ था वो कुछ हद तक साफ होता नजर आ रहा है. दूसरी बात जिस पर हम इस लेख में व्यापक चर्चा करने वाले हैं, वो भारतीय गेंदबाजों का प्रदर्शन खासकर तेज गेंदबाजों का प्रदर्शन है.

अगर हम कहें कि भारतीय तेज गेंदबाजी अपने सुनहरे दौर से गुजर रही है तो कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी. ऑस्ट्रेलिया में भारतीय टीम का प्रदर्शन इसका जीता जागता उदाहरण है.

इस दौर में भारत के पास जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद शमी, इशांत शर्मा, भुवनेश्वर कुमार और उमेश यादव जैसे विश्वस्तरीय तेज गेंदबाज मौजूद हैं. खासकर बुमराह के आने के बाद से भारतीय तेज गेंदबाजी को नई दिशा मिली है.

साल 2018 भारतीय तेज गेंदबाजों के नाम रहा. इस दौरान बुमराह, ईशांत और शमी की तिकड़ी ने वेस्टइंडीज का 34 साल पुराना रिकार्ड तोड़ डाला. इस तिगड़ी ने कुल मिलाकर 136 विकेट चटकाए जो किसी भी टीम के तेज गेंदबाजों द्वारा एक साल में लिए गए सबसे ज्यादा विकेट हैं.

इससे पहले 1984 में वेस्टइंडीज की तरफ से तीन तेज गेंदबाजों ने मिलकर एक साल में 130 विकेट लिए थे.

अगर केवल 2018 के आंकड़ों पर गौर करें तो इस दौरान भारतीय तेज गेंदबाजों ने 14 टेस्ट मैचों में लगभग 23 के औसत से 172 बल्लेबाजों को पवेलियन का रास्ता दिखाया. इस साल सबसे बेहतरीन प्रदर्शन जसप्रीत बुमराह का रहा, जिन्होंने केवल 9 टेस्ट मैचों में 46 विकेट लिए.

अगर ऑस्ट्रेलिया दौरे की बात करें तो भारतीय गेंदबाजों ने मेजबान बल्लेबाजों को पूरी तरह से घुटनों पर ला दिया. मेलबर्न टेस्ट की पहली पारी में पूरी मेजबान टीम 152 रन पर ही ढेर हो गई. इस पारी में बुमराह ने 6 विकेट चटकाए जो उनका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन भी था.

यही नहीं एडिलेड ओवल के मैदान में खेले गए पहले मैच में भारतीय टीम ने 31 रन से जीत दर्ज की थी. इस मैच में बुमराह ने ऑस्ट्रेलिया को हराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. दूसरी पारी में 323 रनों का पीछा करते हुए पूरी मेजबान टीम 291 रन पर आउट हो गई थी.

ऐसा नहीं है कि पहले भारतीय टीम के पास अच्छे तेज गेंदबाज नहीं थे. लेकिन शायद इतनी मजबूत बेंच स्ट्रेंथ कभी ही रही हो. फिटनेस तेज गेंदबाजों के लिए हमेशा एक गंभीर विषय रहा है.

ऐसे में किसी एक गेंदबाज की फिटनेस का खामियाजा टीम को ना उठाना पड़े इसके लिए बेंच स्ट्रेंथ का मजबूत होना बहुत जरूरी है. यही कारण है कि भारतीय गेंदबाजी लगातार बेहतर प्रदर्शन करने में सफल रही है.

इससे पहले भारत के पास वेंकटेश प्रसाद, जवागल श्रीनाथ से लेकर श्रीसंथ, जहीर खान और आशीष नेहरा जैसे बड़े नाम रहे हैं. लेकिन एक समय इतने विश्वस्तरीय तेज गेंदबाजों की कमी भारतीय टीम ने हमेशा महसूस की है.

भारतीय तेज गेंदबाजों के शानदार प्रदर्शन के चलते उनकी तारीफ पूरी दुनिया में हो रही है. ऑस्ट्रेलिया सहित दुनिया के तमाम बड़े खिलाड़ियों ने भारतीय गेंदबाजी की प्रशंसा की है.

लिटिल मास्टर के नाम से मशहूर पूर्व भारतीय बल्लेबाज सुनील गावस्कर ने हाल में कहा था कि इस समय भारत का तेज आक्रमण अपने सबसे अच्छे दौर से गुजर रहा है. पूर्व भारतीय कप्तान राहुल द्रविड़ ने कहा था कि इस समय भारतीय गेंदबाज एक टेस्ट मैच में पूरे 20 विकेट लेने की काबिलियत रखते हैं.

भारतीय तेज गेंदबाजों ने गेंद पर जिस तरह से अपनी पकड़ दिखाई है, वह भारतीय टीम के हालिया प्रदर्शन में झलकती है. इस समय भारतीय टीम टेस्ट रैंकिंग में 116 अंको के साथ पहले नंबर पर मौजूद है. अगर इंग्लैंड दौरे को छोड़ दें तो भारत का प्रदर्शन बेहतरीन रहा.

मेलबर्न टेस्ट में भारतीय तिकड़ी ने गेंद को दोनों ओर से स्विंग कराया. उनकी शार्ट पिच गेंदों में भी धार नजर आई. बुमराह ने अपने स्लोवर और यार्कर से ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों को खूब परेशान किया. साथ ही दूसरे छोर से शमी ने भी शानदार गेंदबाजी की. शमी अपनी स्लोवर बाउंसर और स्विंग के लिए जाने जाते हैं.

अब इस टेस्ट सीरीज का एक मात्र मैच बचा है जो सिडनी में 3 जनवरी से खेला जायेगा. हालांकि ऑस्ट्रेलिया भारत को हराने का मौका तो चूक चुका है, लेकिन भारतीय टीम के पास जीत दर्ज कर नया कीर्तिमान स्थापित करने का मौका है.

एक बात तो पक्की है कि अगर भारतीय टीम ऑस्ट्रेलिया में कोई टेस्ट सीरीज कभी ना जीत पाने का धब्बा साफ करना चाहती है तो तेज गेंदबाजों को अपने इसी दमखम से गेंदबाजी करनी होगी.