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कृषि संकट से उभरने के लिए मंडियों में टैक्स सुधार का सुझाव

govt panel suggests tax reforms in mandis to tackle farm distress

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कृषि उपज को बेचने और खरीदने के लिए बनाई गई मंडियों को बेहतर बनाने के लिए सरकार नए टैक्स सुधार लागू कर सकती है.

मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के एजेंडे में शामिल मंडियों की व्यवस्था में सुधार के लिए गठित एक अंतर मंत्रालयी पैनल ने विभिन्न सुझाव दिए हैं.

हिंदुस्तान टाइम्स की खबर के मुताबिक पैनल ने मंडियों में व्यापार समस्याओं के आधार पर सरकार को सुझाव भेजे हैं. पैनल की विभिन्न कमिटियों में से एक ने पाया कि मंडियों में फैली व्यापार संबंधित समस्याओं के कारण किसान बुरी तरह प्रभावित हुए हैं. जो कृषि बाजारों की खस्ता हालत और कृषि में कम मुनाफे के लिए जिम्मेदार है.

मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी ने बताया कि सरकार को सुझाव दिया गया है कि देश भर में ‘सिंगल मंडी टैक्स’ हो. एक राज्य से दूसरे राज्य में कृषि उपज बेचने पर व्यापारियों और किसानों पर लगने वाले करों को हटाया जाए.

भारत में व्यवस्थित और अव्यवस्थित बाजारों के साथ कृषि विपणन एक जटिल प्रक्रिया है. किसान अधिकतर राज्य स्तर पर चलने वाली कृषि उत्पाद विपणन समिति (एपीएमसी) में ही उपज बेचते हैं. 16 राज्यों और दो केंद्र शासित प्रदेशों में फिलहाल ऐसी 585 एपीएमसी हैं.

1960 के दशक में लागू हुए एपीएमसी अधिनियम के मुताबिक किसानों को उपज अपने ही क्षेत्र में अधिसूचित बाजारों में लाइसेंस धारक बिचौलियों को ही बेचनी होती है.

ये नियम उपज की बिक्री से जुड़ी समस्याओं को कम करने के लिए बनाए गए थे. हालांकि बीते कई वर्षों में अगल-अलग स्तरों पर बिचौलियों की संख्या इतनी तेजी से बढ़ती चली गई कि किसानों का मुनाफा कम होता चला गया.

कमिटी ने मालगोदाम तंत्र को भी विकसित करने का सुझाव दिया है. जिसके तहत किसानों के पास सुविधा होगी कि बेहतर दामों के इंतजार में वो अपनी उपज को गोदाम में सुरक्षित रख सकें.

एक अधिकारी ने कहा कि सरकार ने राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) के तंत्र को विकसित किया है. हालांकि अब भी कई राज्यों में ये व्यवस्था लागू नहीं की गई है. कमिटी ने इसके लिए देश भर के ऐसे बाजारों के लिए एक ही लाइसेंस जारी करने का भी सुझाव दिया है.

कृषि बाजारों में सुधार के उद्देश्य से नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने पहले कार्यकाल में दो मॉडल कानूनों को मंजूरी दी थी. ये कृषि उत्पाद और पशुधन विपणन (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम 2018 और कृषि उत्पाद और पशुधन अनुबंध खेती एवं सेवाएं (प्रोत्साहन एवं सहूलियत) अधिनियम 2018 हैं.

एक अधिकारी ने कहा कि अब तक इन बदलावों के परिणाम जमीनी स्तर पर देखने को नहीं मिले हैं.

कुछ मंत्रियों द्वारा तैयार एक रिपोर्ट में कहा गया है कि मोदी सरकार द्वारा किए जाए बदलावों का उद्देश्य एपीएमसी व्यापारियों के एकाधिकार को खत्म करना है. इसके जरिए मंडियों की व्यवस्था से इतर निजी बाजारों की ऐसा व्यवस्था खड़ी करना था जहां किसानों अपनी उपज बेच सके.