JNU हिंसा के खिलाफ छात्रों का साथ देने कैंपस पहुंची दीपिका पादुकोण

Team NewsPlatform | January 7, 2020

deepika padukone reaches jnu against jnu violence

 

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में पांच जनवरी को हुई हिंसा के विरोध में छात्रों का साथ देने के लिए फिल्म स्टार दीपिका पादुकोण विश्वविद्यालय कैंपस पहुंचीं. वे शाम को करीब सात बजकर 45 मिनट पर कैंपस पहुंची और करीब दस मिनट तक रुकीं. इसके बाद वे बिना कुछ कहे वापस चली गईं.

पांच जनवरी की रात को कुछ नकाबपोश गुंडे विश्वविद्यालय के मेन गेट से कैंपस में घुस आए और उन्होंने वहां छात्रों और शिक्षकों को पीटने के साथ विश्वविद्यालय की संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया. उपद्रवियों के हमले में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आईशी घोष और प्रोफेसर सुचित्रा सेन बुरी तरह से घायल हो गईं. दोनों के सर पर बुरी चोट लगी और इससे जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए.

दीपिका के कैंपस में आने से पहले ही बॉलीवुड की कई हस्तियां जेएनयू हमले के खिलाफ अपना विरोध दर्ज करा चुकी हैं. दीपिका पादुकोण अपनी आने वाली फिल्म छपाक के प्रमोशन के सिलसिले में दिल्ली आई हुई हैं. वे काले लिबास में जेएनयू पहुंची. इस काले लिबास को प्रतिरोध के प्रतीक के रूप में देखा जा रहा है.

दीपिका के कैंपस में आते ही छात्रों ने आजादी के नारों से उनका स्वागत किया. जेएनयू आने से जुड़ी उनकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं.

इस बीच बीजेपी के नेता तजिंदर पाल सिंह बग्गा ने दीपिका की आगामी फिल्म छपाक को बॉयकॉट करने की बात कही है.

इससे पहले छह जनवरी को अनुराग कश्यप, तापसी पन्नू, जोया अख्तर, विशाल भारद्वाज, स्वानंद किरकिरे, अनुभव सिन्हा, रिचा चड्ढा और अली फजल जैसी बॉलीवुड हस्तियों ने मुंबई में जेएनयू हमले का विरोध किया. उन्होंने गेटवे ऑफ इंडिया के पास प्रदर्शन किया.

जेएनयू हिंसा में दिल्ली पुलिस अभी तक किसी भी नकाबपोश उपद्रवी को गिरफ्तार नहीं कर पाई है.


Big News

Opinion

No, Salman Khan Does Not Drink Children’s Tears: How Speculative Reporting Allowed QAnon Theories To Spread in India
No, Salman Khan Does Not Drink Children’s Tears: How Speculative Reporting Allowed QAnon Theories To Spread in India
On September 14, a lawyer named Vibhor Anand published some big “revelations” on his Twitter account. His account is now…
hathras girl
क्या दलित इंसान नहीं हैं? क्या उनकी अंतिम इच्छा नहीं हो सकती है?
रेयाज़ अहमद: क्या आप हमें बता सकते हैं कि 14 अक्टूबर के लिए क्या योजना बनाई गई है - कितने…
भीम कन्या
भीम कन्या
यह एक भव्य कार्यक्रम है। पुरे भारत में क़रीब एक हज़ार गाँव में 14 अक्टूबर को प्रेरणा सभा का आयोजन…

Humans of Democracy