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सीबीआई निदेशक राव ने ठुकराया आलोक वर्मा का अनुरोध

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सीबीआई निदेशक (प्रभारी) एम नागेश्वर राव ने आयकर अधिकारी और बिचौलिए के खिलाफ भ्रष्टाचार के कथित मामले की फाइल दोबारा खोलने के एजेंसी के निदेशक आलोक वर्मा के मौखिक अनुरोध को ठुकरा दिया है. राव ने कहा कि यह एक नीतिगत फैसला है और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आलोक में वह ऐसा फैसला नहीं कर सकते हैं.

सीबीआई के एक प्रवक्ता ने कहा कि जब फाइल अंतरिम निदेशक के पास गई तो उन्होंने फाइल दोबारा खोलने से मना करते हुए कहा कि इसके लिए मंजूरी देना नीतिगत फैसला होगा जो शीर्ष अदालत के निर्देशों के खिलाफ है.

सीबीआई ने भ्रष्टाचार में संलिप्तता को लेकर 2016 में आयकर विभाग के नौ वरिष्ठ अधिकारियों और चार्टर एकाउंटेंट संजय भंडारी सहित तीन अन्य लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया था.

26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने राव को नीतिगत या कोई बड़ा फैसला नहीं लेने का निर्देश दिया था.

अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक राव ने इस मामले से जुड़ी क्लोजर रिपोर्ट को 11 नवंबर को मंजूरी दी थी.  साल 2016 में सीबीआई ने चार्टर एकाउंटेंट भंडारी उसके दो बेटे श्रेयांस और दिव्यांग सहित कुल नौ आयकर अधिकारी पर भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था. इन अधिकारियों पर आरोप है कि इन्होंने भंडारी के क्लाईंट की मदद के एवज में फाइव स्टार होटल, लक्जरी कार और फ्लाइट की सेवाएं ली थी.

सीबीआई ने एक अन्य मामले में साल 2015 में श्रेयांस भंडारी (संजय भंडारी के बेटे) से घूस लेने के आरोप में ज्वाईंट कमिश्नर सालोंग याडेन को गिरफ्तार किया था.

सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा ने सात जून को मदुरैई में केस को दोबारा खोलने के मौखिक आदेश दिए थे. इस मामले में राव ने कहा कि 13 मार्च 2018 को केस अपने अंतिम निष्कर्ष पर पहुंच गया है और कोर्ट उसी के मुताबिक अपना फैसला लेगी.

राव मार्च महीने में सीबीआई के चेन्नई जोन के डायरेक्ट थे. उन्होंने भंडारी के केस को बंद करने की मंजूरी दी थी. मई में वह सीबीआई हेडक्वाटर आये. पिछले महीने उन्हें सीबीआई का प्रभारी निदेशक बनाया गया है.