बीजेपी सांसद का बेतुका बयान- मंदी की बात करके देश को बदनाम किया जा रहा

Team NewsPlatform | December 5, 2019

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बीजेपी के नेताओं की तरफ से बेतुके बयानों का सिलसिला जारी है. इसी कड़ी में अब बीजेपी सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त का नाम भी जुड़ गया है.

लोकसभा में चर्चा के दौरान वीरेंद्र सिंह ने कहा कि देश और सरकार को बदनाम करने के लिए लोग यह कह रहे हैं कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी है. उन्होंने कहा कि यदि ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी है तो सड़कों पर ट्रैफिक जाम क्यों लग रहे हैं.

हाल ही में आए आंकड़ों से पता चला है कि नवंबर महीने में विभिन्न ऑटोमोबाइल कंपनियों की बिक्री में कमी आई है.

अलग-अलग कंपनियों की बात करें तो मारुति सुजुकी की बिक्री में नवंबर महीने में 1.9 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है. वहीं इसी महीने में कंपनी के निर्यात में भी 7.7 प्रतिशत कमी आई है.

महिंद्रा एंड महिंद्रा (एमएंडएम) की कुल बिक्री में नवंबर में 9 प्रतिशत में गिरावट हुई. इसका निर्यात भी 26 प्रतिशत गिर गया. टाटा मोटर्स की नवंबर में बिक्री में 25.32 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई. होंडा कार्स की बिक्री में सर्वाधिक 50.33 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई.

वहीं केवल हुंडई मोटर इंडिया लिमिटेड की नवंबर में कुल बिक्री में 7.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि को लेकर जारी सरकारी आंकड़ों से पता चला कि इस तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर केवल 4.5 प्रतिशत रही. यह पिछले छह सालों में सबसे कम है. इससे पहले वाली तिमाही में यह 5 प्रतिशत थी.

असल में ऑटोमोबाइल सेक्टर में जारी मंदी को लेकर बेतुका बयान देने वाले नेताओं में वीरेंद्र सिंह मस्त अकेले नहीं. खुद वित्त मंत्री भी ऐसा बयान दे चुकी हैं.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि ऑटोमोबाइल सेक्टर में मंदी इसलिए है क्योंकि मिलेनियल्स खुद गाड़ी खरीदने की जगह ओला और ऊबर को प्राथमिकता दे रहे हैं.

वहीं कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था कि अर्थव्यवस्था में मंदी नहीं है क्योंकि फिल्में सौ से दो सौ करोड़ रुपये कमा रही हैं. हालांकि, सोशल मीडिया पर खिल्ली उड़ने के बाद उन्होंने बयान वापस ले लिया था.

बीजेपी के एक और सांसद निशिकांत दुबे ने भी लोकसभा में बेतुका बयान देते हुए कहा कि 1934 से पहले जीडीपी नहीं थी इसलिए उसके ऊपर भरोसा करना सही नहीं है. निशिकांत दुबे ने अमेरिकी राष्ट्रपति केनेडी की मौत के पांच साल बाद उन्हें जिंदा कर दिया और कहा कि केनेडी ने कहा था कि अर्थव्यवस्था में जीडीपी का कोई मतलब नहीं है.


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