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बांग्लादेश आम चुनाव: अवामी लीग के लिए बड़ी चुनौती

 

भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में 30 दिसंबर को आम चुनाव होने जा रहे हैं. यह पहली बार होगा जब चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का इस्तेमाल किया जाएगा. यूं तो बांग्लादेश की राजनीति हमेशा से यहां की दो मुख्य पार्टी वर्तमान प्रधानमंत्री शेख हसीना की बांग्लादेश अवामी लीग और खालिदा जिया की पार्टी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के इर्द-गिर्द घूमती नज़र आई है, लेकिन इस बार एक तीसरा मोर्चा जातीय ओइक्को फ्रंट महागठबंधन के रूप में हसीना के लिए चुनौती की तरह उभरता दिखाई दे रहा है. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी भी इसी गठबंधन का हिस्सा है.

शेख हसीना विकास के मुद्दे को लिए चुनाव जीत कर चौथी बार सत्ता पर काबिज़ होने की होने के लिए हर संभव प्रयास कर रही हैं, तो वहीं विपक्षी जातीय ओइक्को फ्रंट भी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी के नेतृत्व में शेख हसीना और बांग्लादेश अवामी लीग के हाथ से सत्ता की चाभी छीनने के लिए पूरा जोर लगा रही है. उसने सत्ताधारी अवामी लीग के कुछ हालिया कदमों के विरोध में उपजे जन असंतोष का लाभ लेने के लिए पूरी तैयारी की है. खासकर, मौलिक अधिकारों के प्रश्न, शासन में पारदर्शिता और स्वतंत्र न्यायपालिका आदि मुद्दों को आधार बनाकर वह अवामी लीग के खिलाफ चुनाव मैदान में उतरने को तैयार है.

वहीं सरकार बनाने के लिए हसीना की राह इस बार इतनी आसान नहीं है. साल 2014 के चुनाव का बहिष्कार करने के बाद विपक्षी पार्टी बीएनपी इस बार चुनाव लड़ने को हामी भर चुकी है. इतना ही नहीं बांग्लादेश की राजनीति में अपेक्षाकृत प्रगतिशील चेहरा माने जाने वाले कमल हुसैन इस बार जातीय ओइक्को फ्रंट का नेतृत्व कर रहे हैं. फिर, बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी जमात-ए- इस्लामी भी शेख हसीना के लिए खतरा बनी हुई है.

बता दें कि पूर्व प्रधानमंत्री व विपक्षी दल बीएनपी की मुखिया खालिदा जिया भ्रष्टाचार के आरोप में जेल की सज़ा काट रही हैं. उन्होंने चुनाव लड़ने की मंशा जताई थी, लेकिन अदालत ने उनकी अर्जी को खारिज कर उन्हें अयोग्य करार दे दिया था. अदालत का कहना था कि दो साल से ज्यादा सज़ा काट चुका व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकता. बावजूद इसके, बांग्लादेश की राजनीति पर उनका प्रभाव निर्विवाद है. जानकार मान रहे हैं कि इस चुनाव में भी उनका असर रहेगा.

हालांकि इन दोनों दलों के बार-बार हो रहे टकराव के चलते बांग्लादेश का चुनावी माहौल काफी तनावपूर्ण बना हुआ है. इसी को देखते हुए सोमवार को बांग्लादेश के निर्वाचन क्षेत्रों में भारी संख्या में सशस्त्र बलों की तैनाती कर दी गई है .

आइए जानते हैं बांग्लादेश की राजनीति से जुड़ी मुख्य बातें
• बांग्लादेश में 30 दिसंबर को 300 सीटों के लिए होंगे 11वें आम चुनाव. चुनाव आयोग के अनुसार चुनाव में 1841 उम्मीदवार भाग लेंगे.
• पहली बार होगा जब चुनाव में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (EVM) का इस्तेमाल किया जाएगा
• मुख्य विपक्षी दल बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी बीएनपी की मुखिया 73 साल की खालिदा जिया जेल में होने के कारण चुनाव नहीं लड़ सकेंगी.
• बांग्लादेश के पूर्व विदेशमंत्री और कमल हुसैन इस बार विपक्षी महागठबंधन जातीय ओइक्को फ्रंट का नेतृत्व कर रहे हैं.
• बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने भी बीएनपी को समर्थन देने का फैसला किया है, इससे अवामी लीग के सामने ओइक्को फ्रंट महागठबंधन की चुनौती काफी बढ़ गई है.
• चुनावों की तारिख के एलान के बाद से विपक्षी दलों के लगभग 21000 कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी हो चुकी है.

बांग्लादेश के आम चुनाव में यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि पिछले दस सालों से सत्ता पर काबिज़ शेख हसीना को कानून व्यवस्था, सामाजिक क्षेत्र और अर्थव्यवस्था में किए गए अच्छे काम चौथी बार सिंहासन तक पहुंचाते हैं या विपक्षी दलों की एकजुटता और एंटी इनकमबेंसी उनकी पार्टी को वापस विपक्ष की कुर्सी तक ले जाती है.