आंध्र प्रदेश ने महिलाओं, बच्चों के खिलाफ अपराध के मामलों की जल्द सुनवाई के लिए विधेयक पारित किया

Team NewsPlatform | December 13, 2019

in up's mainpuri minor dalit girl molested fir against rss office bearer

 

आंध्र प्रदेश विधानसभा ने भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) में संशोधन के लिए एक विधेयक पारित किया है. इस संशोधन में यह प्रावधान किया गया है कि महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों, खास कर यौन अपराधों के मामलों की तेजी से जांच और सुनवाई की जाएगी.

प्रस्तावित नए कानून का नाम ‘आंध्र प्रदेश दिशा अधिनियम आपराधिक कानून (आंध्र प्रदेश संशोधन) अधिनियम, 2019 रखा गया है. हाल ही में पड़ोसी राज्य तेलंगाना में एक पशु चिकित्सक से बलात्कार के बाद उसकी हत्या का मामला सामने आया था.

गृह राज्य मंत्री एम सुचरिता ने यह विधेयक विधानसभा में पेश किया, जिसे सत्तारूढ़ पार्टी वाईएसआर कांग्रेस ने ‘क्रांतिकारी’ बताया.

नए कानून के तहत यौन अपराध के मामलों की जांच दर्ज होने के सात कामकाजी दिन के भीतर पूरी होगी और आरोपपत्र दाखिल किए जाने के 14 कामकाजी दिन के भीतर मुकदमे की सुनवाई पूरी करनी होगी.

नए कानून के तहत दी गई सजा के खिलाफ अपील का निपटारा छह महीने के भीतर करना होगा.

आईपीसी में तीन नई धाराएं 354ई, 354एफ और 354जी शामिल की जाएंगी. इन धाराओं के तहत क्रमश: महिलाओं के उत्पीड़न, बच्चों के यौन उत्पीड़न और बच्चों पर बढ़ रहे यौन हमले की व्याख्या की गई है.

विधानसभा ने एक और विधेयक पारित किया जिसके तहत महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की त्वरित सुनवाई के लिए विशेष अदालतों का गठन होगा.

प्रस्तावित नए कानून के जरिए महिलाओं और बच्चों के खिलाफ अपराधों की तेजी से सुनवाई के लिए प्रत्येक जिले में एक या अधिक विशेष अदालतों का गठन हो सकेगा.

इन अपराधों की जांच के लिए उपाधीक्षक स्तर के पुलिस अधिकारी के नेतृत्व में पुलिस की विशेष टीम बनाने का भी अधिकार होगा.


Big News