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हाउडी मोदी के लिए जुटे प्रशंसक, विरोध में भी उठे स्वर

American-Indian fans gathered for Howdy Modi, voice raised in protest

 

अमेरिका के ह्यूस्टन में होने वाले हाउडी मोदी कार्यक्रम के लिए लोग जुटने लगे हैं.  न्यूज एजेंसी एएनआई ने कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आए लोगों के हवाले से कहा, ‘हम नरेन्द्र मोदी को देखने के लिए उत्सुक हैं, उन्हें सुनना चाहते हैं क्योंकि वह देश और दुनिया के लोगों के लिए प्रेरणास्रोत हैं.’ इस कार्यक्रम को पीएम मोदी के साथ-साथ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप संयुक्त रूप से संबोधित करने वाले हैं. इसके बाद 24 सितंबर को नरेन्द्र मोदी न्यूयार्क में डोनल्ड ट्रंप से  मिलेंगे.

व्हाइट हाउस की ओर से 21 सितंबर की देर शाम जारी बयान के मुताबिक ट्रंप 100 मिनट तक एनआरजी स्टेडियम में रहेंगे. हालांकि उनके भाषण का समय नहीं बताया गया है लेकिन माना जा रहा है कि यह करीब 30 मिनट का होगा.

दावा किया जा रहा है कि ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पूरे अमेरिका से 50,000 से अधिक भारतीय-अमेरिकियों ने अपना पंजीकरण कराया है. यह अमेरिका में प्रभावशाली भारतीयों का सबसे बड़ा समागम है.

ह्यूस्टन में भारतीय अमेरिकी डॉक्टरों के संगठन के पूर्व अध्यक्ष राकेश मंगल ने कहा कि ट्रंप का ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में हिस्सा लेना यह दिखाता है कि भारत पूरी दुनिया खास तौर पर अमेरिका के लिए कितना महत्वपूर्ण है.

रिपब्लिकन हिंदू कॉलिशन के शलभ कुमार ने कहा कि ह्यूस्टन में अमेरिकी राष्ट्रपति का मोदी के साथ मंच साझा करना ‘स्पष्ट रूप से यह दिखाता है कि पाकिस्तान को लेकर अमेरिका का रुख क्या है.

उन्होंने कहा कि पाकिस्तान की यहां एनआरजी स्टेडियम के सामने कश्मीर मुद्दे को लेकर प्रदर्शन करने की योजना थी, उनका दावा है कि इसे काफी हद तक रद्द कर दिया गया है.

न्यू मेक्सिको से इस कार्यक्रम के लिए ह्यूस्टन आए सतपाल सिंह खालसा ने कहा, ” प्रधानमंत्री मोदी सिख समुदाय के लिए जो काम कर रहे हैं, उसके लिए हम यहां उनके स्वागत के लिए हैं. वह प्रधानमंत्री के रूप में बेहतरीन काम कर रहे हैं. उन्होंने पिछले 70 साल में किसी भी प्रधानमंत्री के मुकाबले अच्छा काम किया है.”

इसी बीच कई मानवाधिकार संगठन और अलगाववादी समूह भी मोदी के खिलाफ प्रदर्शन करने के लिए ह्यूस्टन में जमा हो गए गए हैं. अलगाववादी सिख और कश्मीरी संगठन जिनकी पाकिस्तान से नजदीकियां हैं, वह बड़ी संख्या में ह्यूस्टन पहुंच चुके हैं.

अलायंस फॉर जस्टिस एंड अकांउटिबिलिटी ने कहा, ” हम एक हैं और हमारा एजेंडा एक है: हमें लोकतंत्र विरोधी, जनता विरोधी और अल्पसंख्यक विरोधी मोदी सरकार और बीजेपी के एजेंडा का पर्दाफाश करना है।”

वहीं एचएफएचआर की सह संस्थापक सुनीता विश्वनाथ ने कहा कि उनका संगठन यहां इसलिए प्रदर्शन कर रहा है क्योंकि हिंदू हिंदुत्व के नाम पर मानवाधिकार का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं कर सकता.

इससे पहले अमेरिका की एक सप्ताह की यात्रा के पहले दिन ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अमेरिका के तेल तथा गैस क्षेत्र की कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों (सीईओ) के साथ बैठक की है. इस बैठक में भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अवसरों के दोहन पर चर्चा हुई.

यह गोलमेज बैठक ऊर्जा सुरक्षा के लिए साथ मिलकर काम करने और भारत-अमेरिका के बीच साझा निवेश के अवसरों को बढ़ाने पर केन्द्रित थी.

बैठक के बाद मोदी ने ट्वीट किया , ” यह संभव नहीं है कि ह्यूस्टन आएं और ऊर्जा पर बातचीत ना हो. ऊर्जा क्षेत्र के शीर्ष सीईओ के साथ शानदार बातचीत हुई. हमने ऊर्जा क्षेत्र में अवसर उत्पन्न करने के तरीकों पर चर्चा की.”

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने बताया कि बैठक में 17 वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारी शामिल हुए. इन कंपनियों की उपस्थितिक 150 देशों में है और इनका सामूहिक नेटवर्थ 1,000 अरब डॉलर है.

उन्होंने बताया कि से सभी कंपनियों किसी न किसी रूप में भारत से जुड़ी हैं।

अमेरिका की प्राकृतिक गैस कंपनी टेल्यूरियन इंक और भारत की पेट्रोनेट एलएनजी कंपनी लि. (पीएलएल) ने एक सहमति ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत पीएलएल और उसकी सहायक इकाइयां अमेरिका से सालाना 50 लाख टन तरलीकृत प्राकृतिक गैस (एलएनजी) का आयात करेंगी.

इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) ने अमेरिका के कई शीर्ष पेट्रोलियम कंपनियों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों के साथ मोदी की तस्वीरें ट्वीटर पर साझा कीं.